तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
न्यायधानी बिलासपुर की धरती ने अनेक ऐसे प्रशासनिक रत्न दिए हैं जिन्होंने अपनी कर्मनिष्ठा, ईमानदारी और जनसेवा से समाज में नई पहचान बनाई है। इन्हीं में से एक नाम है , योग्यता साहू, जो आज जिला जांजगीर-चांपा एवं सक्ति की नगर सेना, होमगार्ड एवं अग्निशमन विभाग की जिला सेनानी (कमांडेंट) के रूप में प्रशासनिक क्षेत्र में अलग ही चमक बिखेर रही हैं।योग्यता साहू की प्रशासनिक यात्रा किसी प्रेरक गाथा से कम नहीं। बिल्हा की नायाब तहसीलदार के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ऐसी निष्ठा और जनसंपर्क क्षमता के साथ की कि ग्रामीण अंचलों से लेकर अफसरशाही तक, हर जगह उनकी चर्चा रही। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान तक, उनका हर कदम एक जिम्मेदार और संवेदनशील अधिकारी की पहचान बन गया।आज जब वे जिला सेनानी (कमांडेंट) के रूप में कार्यरत हैं, तब उनके कंधों पर तीन अहम जिम्मेदारियाँ हैं । अग्निशमन सेवा, नगर सेना और होमगार्ड का नेतृत्व। इन तीनों में जोखिम, तत्परता और मानवीय संवेदना की जो त्रिवेणी है, उसे योग्यता साहू ने अपने दृढ़ नेतृत्व से बखूबी साध लिया है। आपदा हो या आकस्मिक दुर्घटना, वे हर संकट के समय मैदान में खुद उतरकर नेतृत्व करने वाली अधिकारी के रूप में पहचानी जाती हैं।प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, योग्यता साहू अपनी सख़्त अनुशासनप्रियता, पारदर्शिता और संवेदनशील व्यवहार के कारण विभाग में विशेष स्थान रखती हैं। उनके अधीनस्थ कर्मचारी उन्हें स्नेहपूर्वक “मैडम कमांडर” कहते हैं, क्योंकि वे न केवल एक अधिकारी हैं बल्कि मार्गदर्शक, प्रेरक और संरक्षक की भूमिका भी निभाती हैं।बिलासपुर से जांजगीर तक का यह सफर केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जिसने प्रशासनिक क्षेत्र में महिला नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ी है। योग्यता साहू ने यह साबित किया है कि कर्तव्य, निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ कोई भी महिला प्रशासन की सबसे कठिन जिम्मेदारियों को संभाल सकती है।उनकी यह कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक है कि अगर लगन और कर्मशीलता साथ हो, तो बिल्हा की नायाब तहसीलदार भी “फायर लेडी कमांडर” बनकर पूरे विभाग में ऊर्जा और अनुशासन का नया इतिहास लिख सकती है।


