तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

मुंगेली जिले के कृषि विभाग में उप संचालक एम.आर. तिग्गा के खिलाफ बगावत खुलकर सामने आ गई है। विभाग के समस्त अधिकारी और कर्मचारी अब उनके विरोध में एकजुट हो गए हैं। सामूहिक हस्ताक्षरित ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, कृषि संचालक और कलेक्टर मुंगेली सहित शासन के शीर्ष अधिकारियों से तिग्गा के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।ज्ञापन में तिग्गा पर प्रशासनिक अराजकता, महिला कर्मचारियों के प्रति अनुचित व्यवहार, शासन वाहन का निजी उपयोग, नियम विरुद्ध कार्यों का दबाव और “कलेक्टर के नाम से आदेश” जारी करने जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज की गई हैं।कर्मचारियों ने अपने ज्ञापन में पांच प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से उप संचालक की मनमानी का पूरा ब्यौरा दिया है-महिला कर्मचारियों को कार्यावधि समाप्त होने के बाद भी कार्यालय में रुकने के लिए बाध्य किया जाता है।बिना वैधानिक अनुमति “कलेक्टर के नाम से आदेश” जारी किए जाते हैं।शासन वाहन और सरकारी ईंधन का निजी कार्यों में प्रयोग किया जा रहा है।कर्मचारियों पर नियमविरुद्ध कार्य करने का दबाव और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है।दैनिक मजदूरी दर पर ऑनलाइन कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे नियमित कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख है कि विभाग का वातावरण अब पूरी तरह विषाक्त हो चुका है। तिग्गा की कार्यशैली से न केवल कर्मचारियों का मनोबल टूटा है, बल्कि किसानों से जुड़ी योजनाओं की गति और गुणवत्ता पर भी बुरा असर पड़ रहा है।कर्मचारियों ने शासन से तत्काल उच्चस्तरीय जांच और तिग्गा के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।ज्ञापन के सार्वजनिक होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने मुंगेली से लेकर रायपुर तक प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।अब सवाल यह है,क्या शासन इस खुली बगावत पर कार्रवाई करेगा या फिर एक बार फिर अफसरशाही की ढाल तिग्गा को बचा लेगी?


