तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के मुखिया विष्णु देव साय द्वारा कांग्रेस सरकार में हुए विभिन्न घोटालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कराने में लगे हुए हैं लेकिन परिवहन विभाग में हो रहे घोटाले और फर्जीवाड़ा पर सरकार पूरी तरह से मौन साधे बैठे हुए हैं,जो समझ से परे है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय बिलासपुर एक बार फिर विवादों में है। मामला वाहन क्रमांक सीजी 04 ई 1903 से जुड़ा है, जिसमें पूर्व कर अधिकारी आनंद रूप तिवारी पर शासन के राजस्व को हानि पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।जानकारी के अनुसार, उक्त वाहन पर पूर्व में 2,59,900 रुपए का बकाया टैक्स निर्धारित किया गया था, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसी कर अधिकारी द्वारा अपने ही आदेश को पलटते हुए टैक्स को “शून्य” घोषित कर दिया गया।
शिकायतकर्ता अखिलेश पाठक द्वारा इस प्रकरण में गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराते हुए आर.टी.ओ. बिलासपुर को पत्र जारी किया गया है, जिसमें 3 दिवस के भीतर त्रुटि सुधार करने का निर्देश दिया गया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि सुधार नहीं किया गया तो मामला आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में दर्ज कराया जाएगा।विभागीय सूत्रों ने बताया कि वर्तमान आर.टी.ओ. ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि कर अधिकारी अपने ही आदेश पर पुनर्विचार नहीं कर सकता, जबकि अभिलेखों में यह साफ है कि आनंद रूप तिवारी ने स्वयं अपने आदेश को संशोधित करते हुए टैक्स शून्य कर दिया। यह न केवल छत्तीसगढ़ मोटरयान अधिनियम, 1991 और नियम 1994 का उल्लंघन है, बल्कि शासन को राजस्व हानि पहुँचाने का भी मामला बनता है।पूरे मामले की शिकायत सिटी डिस्पेंसरी गांधी चौक बिलासपुर निवासी अखिलेश कुमार पाठक का कहना है कि आर.टी.ओ. ने यह पत्र जारी करने से पूर्व अपने कार्यालय के चार कर अधिकारियों के आदेशों का अवलोकन तक नहीं किया। यदि किया होता तो यह स्पष्ट हो जाता कि वाहन स्वामी राजेंद्र सोनी ने किसी भी अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील प्रस्तुत नहीं की, फिर भी टैक्स माफ कर दिया गया।इस प्रकरण की 23 सितंबर 2025 को रायपुर स्थित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण में हुई ऑनलाइन सुनवाई में अधिवक्ता शिवेश सिंह और अंशुल रंजन श्रीवास्तव ने दस्तावेजी साक्ष्य सहित टैक्स अनियमितता पर कड़ी आपत्तियाँ दर्ज कीं।अधिवक्ता शिवेश सिंह ने यह भी तर्क दिया कि जब वाहन की मूल नस्ती कार्यालय में उपलब्ध नहीं है, तो बिना दस्तावेज टैक्स माफी कैसे दी गई? वहीं अधिवक्ता अंशुल रंजन ने बताया कि वाहन स्वामी राजेंद्र सोनी की पत्नी के नाम से जांजगीर-चांपा जिले में पंजीकृत दो वाहन (सीजी 16 ए 1194 और सीजी 11 ए 6108) हैं, जिन पर लाखों का टैक्स बकाया है।शिकायत कर्ता का कहना है कि राजेंद्र सोनी पर आरोप है कि उन्होंने तीन कराधिकारियों के आदेशों को दरकिनार करते हुए सीधे छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें टैक्स के अंतर की रुपये 1000 प्रतिमाह राशि पर ब्याज और दंड माफी की मांग की गई।लेकिन जब तत्कालीन कर अधिकारी आनंद रूप तिवारी ने टैक्स को शून्य घोषित कर दिया, तब राजेंद्र सोनी ने चालाकी से याचिका वापस ले ली , जिससे शासन के राजस्व को सीधा नुकसान हुआ। वहीं शिकायतकर्ता अखिलेश पाठक ने पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि “कोई बकाया नहीं प्रमाण पत्र” को 3 दिवस के भीतर निरस्त नहीं किया गया, तो यह प्रकरण एसीबी और ईडब्ल्यूओ जैसी एजेंसियों में दर्ज कराया जाएगा।पत्र में कहा गया है कि “वर्तमान आर.टी.ओ. कार्यालय में त्रुटिपूर्ण आदेशों को छिपाने की कोशिश की जा रही है, और यदि सुधार नहीं किया गया तो जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।


