विकास नंद /सर्वव्यापी/
इस वर्ष दीपावली का त्यौहार करीब है, लेकिन बाजारों में वह रौनक नजर नहीं आ रही जो आमतौर पर इस पर्व के अवसर पर देखने को मिलती थी। बेमौसम बारिश के कारण किसानों की फसलें खेतों में ही खड़ी हैं, जिससे वे न तो फसल काट पा रहे हैं और न ही मंडियों में बेच पा रहे हैं। किसानों की जेब खाली होने से उनकी खरीदारी की क्षमता प्रभावित हुई है।इधर, साय सरकार के कार्यकाल में शासकीय विभागों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन भुगतान भी समय पर नहीं हुआ है। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंच-सरपंचों को भी लंबे समय से मानदेय नहीं मिला है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार दीपावली के सीजन में ग्राहकों की आवाजाही बहुत कम है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय वेतन और मानदेय समय पर दिए जाने से बाजार में नकदी का प्रवाह बना रहता था। साथ ही, किसानों को धान खरीदी की राशि किश्तों में मिलने से वे त्यौहारों के समय खर्च कर पाते थे, जिससे बाजारों में रौनक और उत्साह बना रहता था।
इस बार हालात अलग हैं किसान, कर्मचारी और ग्रामीण प्रतिनिधि — सभी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। परिणामस्वरूप दीपावली की चकाचौंध, मिठाई की खुशबू और बाजारों की रौनक सब कुछ फीकी नजर आ रही है।
लोगों को उम्मीद है कि सरकार शीघ्र ही वेतन, मानदेय और किसानों की राशि का भुगतान सुनिश्चित करेगी, ताकि आने वाले दिनों में बाजारों में कुछ रौनक लौट सके और लोगों के चेहरों पर फिर से मुस्कान दिखाई दे।


