तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
भाजपा की सरकार बनने के बाद से कार्यकर्ताओं में उत्साह जितनी तेजी से बढ़ा था, अब उतनी ही तेजी से निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है। दरअसल, संसदीय सचिवों की नियुक्ति से लेकर शेष बचे निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड, सहकारी बैंकों और अन्य संस्थाओं में अब तक नियुक्तियाँ नहीं हो पाई हैं। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पनप रहा है।सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में कार्यकर्ता खुलकर असंतोष जताने की तैयारी में हैं, परंतु सरकार और संगठन के वरिष्ठ नेता इस नाराजगी को फिलहाल दबाकर रखना चाह रहे हैं। इस स्थिति में भाजपा के भीतर माना जा रहा है कि अब सरकार की साख बचाने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को आगे आना पड़ेगा।डॉ. रमन सिंह, जो पार्टी के सबसे अनुभवी और जमीनी नेताओं में गिने जाते हैं, उनसे कार्यकर्ताओं को अब भी उम्मीद है कि वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और संगठन के बीच सेतु का काम करेंगे और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने की पहल करेंगे।राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि भाजपा सरकार की ‘किरकिरी’ को रोकने और सत्तारूढ़ छवि को संभालने के लिए डॉ. रमन सिंह को ही सामने आना पड़ेगा। वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि नियुक्तियों में देरी से न केवल संगठन की गति धीमी पड़ी है, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी का जनाधार भी प्रभावित हो सकता है।अब सवाल यह है कि क्या डॉ. रमन सिंह एक बार फिर ‘संयम और समन्वय’ की राजनीति से भाजपा सरकार की डगमग छवि को संभाल पाएंगे या यह असंतोष आगे चलकर सरकार के लिए चुनौती बन जाएगा?


