तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग इन दिनों फिर सवालों के घेरे में है। आज गुरूवार को एक महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रतन लाल डांगी पर गंभीर आरोप लगाए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि देर रात तक मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई।सूत्रों के अनुसार, महिला ने पुलिस मुख्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी और वरिष्ठ अधिकारियों से कार्रवाई की मांग भी की थी। बावजूद इसके, प्रशासनिक चुप्पी बनी हुई है। वहीं, आम जनता और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाया है कि क्या कानून केवल आम लोगों के लिए सख्त है और अफसरों के लिए मौन?जनता का कहना है कि यदि यही आरोप किसी सामान्य नागरिक या प्रतिष्ठित व्यापारी, पत्रकार पर लगे होते, तो पुलिस “महिला सुरक्षा” और “तत्काल कार्रवाई” की दुहाई देकर कुछ ही घंटों में एफआईआर दर्ज कर लेती। लेकिन जब मामला वरिष्ठ पुलिस अफसर का आया, तो पूरे तंत्र ने “जांच कर रहे हैं” का बहाना बनाकर मौन धारण कर लिया।कानून विशेषज्ञों का कहना है कि महिला से जुड़ी किसी भी शिकायत में FIR दर्ज करना अनिवार्य है, लेकिन पुलिस के इस रवैये ने समान न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित किया कि जब आरोपी अफसर हो, तो न्याय धीमा पड़ जाता है,और जब आम नागरिक हो, तो कानून तेज़ी से दौड़ता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सरकार और गृह विभाग इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगा या फिर एक बार फिर रुतबा, कानून पर भारी पड़ेगा।


