तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ी संस्कृति और भाषा को नई पहचान दिलाने का बीड़ा एक साधारण किसान पुत्र ने उठाया है। मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र के पचपेड़ी निवासी प्रितम मार्शल (36 वर्ष), पिता गोवर्धन मार्शल, जो पेशे से मोबाइल दुकान संचालक हैं, आज सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपनी रचनात्मकता और लोकभाषा प्रेम के कारण चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।प्रितम का कहना है कि बचपन से ही उन्हें कलाकारी और मंच प्रदर्शन का शौक रहा है। यही जुनून अब उन्होंने मोबाइल कैमरे के जरिए लोगों तक पहुँचाने का माध्यम बनाया है। वे छत्तीसगढ़ी बोली में समाजिक विषयों, ग्रामीण जीवन, हास्य-व्यंग्य और प्रेरणादायी प्रसंगों पर लघु वीडियो बनाते हैं। उनकी रील्स न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि दर्शकों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का काम भी करती हैं।आज फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफार्मों पर प्रितम मार्शल के सैकड़ों वीडियो छत्तीसगढ़ी भाषा की समृद्धता को अभिव्यक्त कर रहे हैं। दर्शक उनकी सहज छत्तीसगढ़ी बोली, अभिनय और जीवन से जुड़े संदेशों को खूब पसंद कर रहे हैं।प्रितम का कहना है कि हमर छत्तीसगढ़ी माटी मा अइसन सुगंध हे, जेला जियत रहना जरूरी हे। मोर कोसिस हे के रील के माध्यम ले अपन भाखा ला हर घर पहुंचावं।उनकी यह कोशिश न सिर्फ छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति लोगों में गर्व की भावना जगाती है, बल्कि युवाओं को भी अपने लोकसंस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है।छत्तीसगढ़ी रील्स के इस उभरते सितारे प्रितम मार्शल ने यह साबित कर दिया है कि अगर जज़्बा और लगन हो, तो एक मोबाइल कैमरा भी छत्तीसगढ़ की पहचान बन सकता है।


