गैर-छत्तीसगढ़िया अफसरों का घमंड चरम पर न फोन उठाते, न जवाब देते; जनता और वरिष्ठ जनों की उपेक्षा का नया ‘प्रशासनिक मॉडल’! - Sarvavyapi गैर-छत्तीसगढ़िया अफसरों का घमंड चरम पर न फोन उठाते, न जवाब देते; जनता और वरिष्ठ जनों की उपेक्षा का नया ‘प्रशासनिक मॉडल’! - Sarvavyapi

गैर-छत्तीसगढ़िया अफसरों का घमंड चरम पर न फोन उठाते, न जवाब देते; जनता और वरिष्ठ जनों की उपेक्षा का नया ‘प्रशासनिक मॉडल’!

Share Now

तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ में पदस्थ गैर-छत्तीसगढ़िया आईएएस और आईपीएस अफसरों के रवैए को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। आम जनता ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ जन और जनप्रतिनिधियों के फोन व संदेशों का जवाब तक ये अफसर देना मुनासिब नहीं समझते। राज्य में नौकरशाही का यह “अहंकारी चेहरा” अब खुलकर चर्चा का विषय बन गया है।भूपेश बघेल सरकार के दौरान भी कुछ अफसरों के ऐसे ही व्यवहार पर सवाल उठे थे, पर तब छत्तीसगढ़िया अधिकारियों जैसे सौम्या चौरसिया और रानू साहू की मेहनत और संवेदनशीलता ने प्रशासनिक छवि को संभाले रखा। लेकिन आज हालात फिर वैसे ही बनते दिख रहे हैं।अब जब सत्ता में भाजपा है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में नई टीम काम कर रही है, तब भी गैर-छत्तीसगढ़िया अफसरों का रवैया नहीं बदला है। कई अफसर प्रदेश की भावनाओं, संस्कृति और स्थानीय नेतृत्व के प्रति उसी तरह उदासीन बने हुए हैं, जैसे वे पहले थे।राज्य के कई जानकारों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की असली ताकत उसके माटी पुत्र अफसरों में है, जो यहां की भावना और जनभावनाओं से जुड़े हैं। बाहर से आए अफसरों को संवेदनशीलता और जवाबदेही का सबक सीखना होगा, वरना जनता की नाराजगी प्रशासन की नींव हिला सकती है। अफसरशाही का घमंड अगर जनता की आवाज दबाएगा, तो एक दिन यही आवाज शासन की दिशा बदल देगी!


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!