तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार के नेतृत्व में मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान ने प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता की नई परिभाषा लिख दी है। जहां अधिकांश राज्यों में मतदाता पुनरीक्षण मात्र औपचारिकता बनकर रह जाता है, वहीं छत्तीसगढ़ में इसे लोकतंत्र के सशक्तिकरण का महाअभियान बनाया गया है।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए न केवल कड़े दिशा-निर्देश जारी किए, बल्कि खुद समीक्षा बैठकों के माध्यम से जिलों की कार्यप्रगति पर लगातार नजर बनाए रखी। आयोग की सक्रियता का ही परिणाम है कि छूटे हुए पात्र मतदाता शामिल हो रहे हैं और फर्जी अथवा दोहराए गए नाम हटाए जा रहे हैं।इस बार पुनरीक्षण प्रक्रिया में तकनीकी साधनों का उपयोग उल्लेखनीय रहा। ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल, बूथ स्तरीय एप्लिकेशन और रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हुई। यशवंत कुमार की पहल पर जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर उन्हें ‘त्रुटि-मुक्त सूची निर्माण’ का लक्ष्य सौंपा गया।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशंवत कुमार ने स्पष्ट कहा कि “मतदाता सूची केवल दस्तावेज़ नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रीढ़ है।” इसी सोच के तहत आयोग ने “मेरा नाम, मेरा वोट” जैसी जनजागरूकता मुहिम चलाई, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम सभाओं और नगरीय वार्डों में नागरिकों को मतदाता सूची जांचने और सुधार कराने हेतु प्रेरित किया गया।राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्ट बताती है कि मतदाता पुनरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव की स्थिति नहीं बनी। आयुक्त यशवंत कुमार ने यह सुनिश्चित किया कि आयोग की कार्यवाही पूर्णतः निष्पक्ष और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप हो।मतदाता पुनरीक्षण की वर्तमान स्थिति का आंकलन करें तो यह साफ झलकता है कि आयोग ने न केवल त्रुटियों को सुधारा है, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत और विश्वसनीय मतदाता सूची की नींव रखी है।छत्तीसगढ़ में निर्वाचन आयोग की यह पहल प्रशासनिक ईमानदारी और लोकतांत्रिक संकल्प का जीवंत उदाहरण है और इसका श्रेय निस्संदेह आयुक्त यशवंत कुमार की दूरदृष्टि, अनुशासन और पारदर्शी नेतृत्व को जाता है।


