तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
बिरसा मुंडा… ये नाव बर जनजाति समाज म सिरिफ इतिहास के पन्ना झन, वो हर परान के संगी, संघर्ष के जोत अउ अस्मिता के पहचाना हावय। आज जब देश भर म जनजाति गौरव दिवस मनाय जावत हे, त छत्तीसगढ़ के डोंगर, जँगल, माटी म बिरसा के गूँज अब ले सुनाय देथे—एक नेता झन, अपन मनखे, अपन पथदर्शक।छत्तीसगढ़ के गोठ-मांझा म बिरसा ला ‘धरती आबा’ कहिके मान-परतिष्ठा देय जाथे। बिरसा मुंडा सिरिफ अंग्रेज राज के खिलाफ खड़ा होई एक बलिदानी नायक झन, वो मनखे जेन उलगुलान कहिके जन-विद्रोह के आगि जलाइस, जनजातीय समाज ला पहिली बेर संगठन के असली ताकत दिखाईस।उनकर संदेश साफ रहिस-“जमीन, जँगल अउ जल सिरिफ साधन झन होवय, ये मनच जीवंत जीवन हावय।”आज के छत्तीसगढ़ म ये बात बराबर लागू होथे। जनजातीय समाज के जगेइबर, वो मन के अधिकार बचइबर अउ संस्कृति ला सहेजइबर बिरसा के विचार आजो मार्गदर्शन देथे।मगर सवाल ये हावय कि का हमन बिरसा के सपना अनुरूप छत्तीसगढ़ बना पाएन?का जनजाति समाज के हक-अधिकार ला सही माने म दे पाएन?का शासन अउ नीति-निर्णय म बिरसा के दर्शन दिखत हे?छत्तीसगढ़ के विकास यात्रा म जनजाति समाज के भूमिका गजब के हावय। शिक्षा, रोजगार, वन-अधिकार, संस्कृति—हर खंड म बिरसा के छोड़े रद्दा नई सिरिफ याद आए, वो हर जगा-जगा प्रेरणा देथे।आज सरकार मन योजनाय बनावत हे, कल्याण कार्यक्रम चलावत हे, त बिरसा मुंडा के विचार अदृश्य रूप म रस्ता देखावत हे। फेर ये घलो सही हे कि अभी घलो बहुते काम करे के जरूरत हवय। विकास के उजाला आखिरी बस्ती तक पहुंचे, जनजातीय संस्कृति ला कोनो चोटे नई पहुंचे, अउ युवा पीढ़ी बर अवसर के दुआर खोले—ये जिम्मेदारी हम सबके हावय।बिरसा मुंडा के जीवन एक मशाल आय, संघर्ष के, अस्मिता के, हिम्मत के।छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज आज घलो उही मशाल के रोशनी म अपन रद्दा गढ़त हे।उनकर जन्मदिवस या पुण्यतिथि म सिरिफ भाषण दे देबो, फोटो लगाबो—येच काफी नई।जरूरी हे कि बिरसा के विरासत ला अपन काम, अपन निर्णय अउ शासन के प्राथमिकता म उतारन। बिरसा मुंडा एक मनखे झन,एक विचार हावय। अउ विचार कभू मरथे नई।धरती आबा बिरसा मुंडा ला कोटी-कोटी नमन।


