राष्ट्रपति से सम्मानित बालोद—कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की वापसी पर उमड़ा सम्मान का सैलाब, जल संरक्षण की मिसाल बना जिला। - Sarvavyapi राष्ट्रपति से सम्मानित बालोद—कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की वापसी पर उमड़ा सम्मान का सैलाब, जल संरक्षण की मिसाल बना जिला। - Sarvavyapi

राष्ट्रपति से सम्मानित बालोद—कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की वापसी पर उमड़ा सम्मान का सैलाब, जल संरक्षण की मिसाल बना जिला।

Share Now

तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने के बाद जब कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा जिला मुख्यालय लौटीं, तो प्रशासनिक परिसर में उनका आत्मीय और गरिमामय स्वागत किया गया। अधिकारी-कर्मचारियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर, अभिनंदन कर और तालियों की गूंज से उनका स्वागत करते हुए जिले की इस असाधारण उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। इस पल ने न केवल कलेक्टर मिश्रा के समर्पण को सम्मानित किया, बल्कि बालोद जिले की सामूहिक जीत की भावना को भी उजागर किया।यह सम्मान जिले को जल संचय, जन भागीदारी अभियान अंतर्गत किए गए उल्लेखनीय कार्यों के कारण प्राप्त हुआ है। बीते दो वर्षों में बालोद जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में जो व्यापक परिवर्तन किए हैं, वह अब राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। जिले के ग्रामीण इलाकों में बड़े-बड़े तालाबों, छोटे जलाशयों, बोल्डर चेक-डैम, तालाब गहरीकरण, नालों के पुनर्जीवन जैसे कार्यों ने जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है। सबसे बड़ी बात, इन सभी गतिविधियों को सरकारी योजना के रूप में नहीं, बल्कि जनता के सहयोग और सहभागिता से एक जन-आंदोलन का स्वरूप दिया गया।कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने सम्मान प्राप्ति के बाद जिले लौटकर कहा कि यह उपलब्धि केवल एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि बालोद जिले के प्रत्येक नागरिक, सरकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और योगदान देने वाले हर व्यक्ति की सामूहिक जीत है। उन्होंने कहा कि “यह सम्मान जिले के हर घर, हर गांव और हर खेत की मेहनत का परिणाम है। बालोद ने दिखाया है कि जब प्रशासन और जनता मिलकर काम करते हैं, तो असंभव भी संभव बन जाता है।”जिला प्रशासन के अनुसार अभियान के दौरान न केवल जल संरचनाओं को बढ़ाया गया, बल्कि स्थानीय समुदायों को जागरूक कर जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाया गया। परिणामस्वरूप जिले के कई गांवों में भू-जल स्तर बढ़ा, सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई, जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान मिला और किसानों की उत्पादकता में भी सुधार आया।अधिकारियों का कहना है कि बालोद का यह मॉडल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि जिले में किए गए नवाचार और सामूहिक प्रयास राष्ट्र के विकास मॉडल में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।कुल मिलाकर, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का यह सम्मान बालोद जिले के लिए गौरव और प्रेरणा का क्षण है। यह उपलब्धि न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए एक उदाहरण है, बल्कि आने वाले समय में भी जल-संरक्षण कार्यों को और अधिक मजबूत दिशा देने वाली है। बालोद जिले ने एक बार फिर साबित किया है कि जनभागीदारी और संवेदनशील प्रशासन मिलकर किसी भी जिले को राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिला सकते हैं।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!