विकास नंद/ सर्वव्यापी/
जनपद पंचायत सरायपाली में प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर की जा रही मनमानी लगातार विवादों को जन्म दे रही है। ताज़ा मामला सहायक वर्ग-3 के पद से जुड़ा है, जहां बिना किसी वैध लिखित आदेश के एक संविदा कर्मी को सीधे पुनः सहायक पद पर बैठा दिया गया है। यह निर्णय पूरी तरह मौखिक निर्देशों पर लिया गया, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।🔎 पूर्व सीईओ के आदेश का उल्लंघन जानकारी के अनुसार, पूर्व जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संविदा कर्मी के विरुद्ध शिकायतें पाए जाने पर उसे स्पष्ट लिखित आदेश के तहत मनरेगा शाखा में भेजा था। आदेश के अनुसार संविदा कर्मचारी को मनरेगा से संबंधित कार्यों में लगाया जाना था।लेकिन वर्तमान सीईओ ने कथित राजनीतिक दबाव में आते हुए इस आदेश को पूरी तरह दरकिनार कर दिया और बिना किसी लिखित अनुमति के संविदा कर्मी को फिर से सहायक वर्ग-3 के पद पर पदस्थ कर दिया। न तो आदेश जारी हुआ, न फाइल नोटशीट चली—पूरा निर्णय सिर्फ मौखिक निर्देशों पर आधारित बताया जा रहा है।–
नियमों की अनदेखी या बढ़ता भ्रष्टाचार?
स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों का कहना है कि सरायपाली जनपद पंचायत में:लिखित प्रशासनिक नियमों का पालन नहीं किया जाता,कई निर्णय व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं,पारदर्शिता का गंभीर अभाव है,और भ्रष्टाचार तथा पक्षपात का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल प्रशासन की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि विभाग में कार्यरत स्थायी कर्मचारियों का मनोबल भी गिरता है।
यदि संविदा कर्मियों को ही नियम ताक पर रखकर महत्वपूर्ण पदों पर बैठा दिया जाएगा, तो नियमित कर्मचारियों का भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित होगा।कर्मचारियों ने इस निर्णय को “अनुचित, अनियमित और नियमों के विरुद्ध” बताया है।
जांच और कार्रवाई की मांग
जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक जनपद पंचायत में नियमों की सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक इस तरह की अनियमितताएँ और मनमानी जारी रहेंगी।
साथ ही, प्रशासन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने के लिए उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई गई है।


