विकास नंद/ सर्वव्यापी/
जनपद पंचायत सरायपाली में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे मनमाने आदेश एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत कार्यालय में सहायक वर्ग-3 के पद पर पदस्थ पंचायत सचिव सुनील नायक को बिना किसी वैध आदेश के पद से हटा दिया गया है। आश्चर्यजनक यह है कि इस संवेदनशील प्रशासनिक निर्णय में किसी भी प्रकार की लिखित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
पूर्व जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने संविदा कर्मी को स्पष्ट लिखित आदेश जारी कर मनरेगा शाखा में भेजा था। आदेश के अनुसार संविदा कर्मचारी को मनरेगा कार्यों में संलग्न किया जाना था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्तमान सीईओ द्वारा कथित राजनीतिक दबाव में आकर इन आदेशों को दरकिनार करते हुए बिना किसी लिखित अनुमति के केवल मौखिक निर्देश पर संविदा कर्मी को पुनः सहायक वर्ग-3 के पद पर बैठा दिया गया।
नियमों का उल्लंघन या भ्रष्टाचार का संकेत?
जनपद पंचायत सरायपाली में इस प्रकार की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि:यहाँ लिखित आदेशों का पालन नहीं किया जाता,कार्यवाही पूरी तरह व्यक्तिगत एवं राजनीतिक स्वार्थ के अनुसार होती है,प्रशासनिक कार्यवाही में पारदर्शिता का अभाव है,और भ्रष्टाचार तथा पक्षपात आम बात बन चुकी है।स्थानीय नागरिक व कर्मचारी इन घटनाओं को प्रशासनिक शुचिता के विपरीत बताते हुए उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारी वर्ग में रोष
सहायक पद पर तैनात पंचायत सचिव सुनील नायक को बिना आदेश हटाए जाने से कर्मचारी वर्ग में गहरा असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि संविदा कर्मी ही नियमों को नजरअंदाज कर प्रभार संभालते रहेंगे, तो स्थायी और नियमित कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित हो जाएगा।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि जनपद पंचायत की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके और नियमों की पुनः प्रतिष्ठा स्थापित हो सके।


