भागवत प्रसाद /ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की मिट्टी, संस्कृति और मातृभाषा को मजबूत पहचान दिलाने की मांग को लेकर प्रदेश के युवा पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता तरुण कौशिक ने एक अत्यंत भावनात्मक अपील करते हुए प्रदेश के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से छत्तीसगढ़ी भाषा को उसके योग्य सम्मान दिलाने का निवेदन किया है। उनकी यह अपील न सिर्फ एक पत्रकार की आवाज है, बल्कि उन हजारों भाषा-प्रेमियों की भावना है जो चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ी को वही सम्मान मिले, जो अन्य राज्यों की मातृभाषाओं को प्राप्त है।सर्वव्यापी संपादक तरुण कौशिक ने मुख्य सचिव विकास शील एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को अपने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि प्रदेश की संस्कृति की साँस, खेतों की महक, लोकगीतों का सुर और पीढ़ियों की विरासत है। बावजूद इसके, यह भाषा आज भी अपने ही प्रदेश में संघर्ष कर रही है—कभी स्कूलों में उचित स्थान के अभाव में, कभी प्रशासनिक कामकाज में उपेक्षित होकर, तो कभी समाज की झिझक की वजह से।उन्होंने कहा कि वह एक साधारण नागरिक और पत्रकार होने के बावजूद अपने मन में यह सपना संजोए रखते हैं कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी हर सरकारी दफ्तर, हर विद्यालय, हर मंच और हर हृदय में गर्व से बोली जाए। उन्होंने लिखा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सहयोग मिले, तो इस भाषा का सम्मान, प्रयोग और प्रभाव दोनों ही तेजी से बढ़ सकता है।उन्होंने मुख्य सचिव विकास शील और सीएम टू पीएस सुबोध कुमार सिंह से अनुरोध किया कि संभव हो तो प्रशासनिक-शैक्षिक ढाँचे में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने, उसे मजबूती प्रदान करने और इसकी गरिमा को बढ़ाने के लिए पहल करें। संपादक तरुण कौशिक ने उल्लेख किया कि आप की एक पहल हजारों युवाओं, कलाकारों, छात्रों और भाषा-प्रेमियों के भविष्य को दिशा दे सकती है।अंत में उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को अपनी “पहचान” और “माटी की आत्मा” बताते हुए आग्रह किया कि इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाए।


