विकास नंद/सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 25 वर्षों के बाद भी अब तक पिछड़े जिलों में गिने जाने वाले महासमुंद को विकास की मुख्यधारा में लाने की जिम्मेदारी अब तीन काबिल आईएएस अधिकारियों के कंधों पर है। जिले की भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक परिस्थितियों को बारीकी से समझने वाले ये तीनों अधिकारी पहले भी यहां जिम्मेदार पदों पर रह चुके हैं, इसलिए जिले की नब्ज और समस्याओं को गहराई से जानते हैं। यही वजह है कि आम जनता को इनसे बड़ी उम्मीदें हैं कि अब शायद विकास की रफ्तार सचमुच ‘टॉप गियर’ में आएगी।—विनय कुमार लंगेह – कलेक्टर, महासमुंदपूर्व में सरायपाली एसडीएम रह चुके युवा व ऊर्जावान अधिकारी विनय कुमार लंगेह जिले की समस्याओं से भली-भांति परिचित हैं। कार्यकुशलता और त्वरित निर्णयों के लिए पहचाने जाने वाले लंगेह के नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्थाओं में तेजी से सुधार की अपेक्षा की जा रही है। ग्रामीण विकास, धान खरीदी, स्वास्थ्य सेवाओं और सड़क सुरक्षा जैसे मोर्चों पर उनके अनुभव को अहम माना जा रहा है।—निहारिका बारिक सिंह – प्रभारी सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभागमहासमुंद की पूर्व कलेक्टर और वर्तमान प्रभारी सचिव निहारिका बारिक सिंह जिले को गहराई से जानती हैं। जिला प्रशासन के ढांचे और ग्रामीण परिवेश पर उनकी मजबूत पकड़ प्रशासन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। महिला स्व-सहायता समूह, आजीविका संवर्धन, पंचायत व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में उनके अनुभव से जिले में बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीद जताई जा रही है।—हेमंत नंदनवार – मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायतसरायपाली में एसडीएम के रूप में उत्कृष्ट कार्य कर चुके हेमंत नंदनवार अब जिला पंचायत के सीईओ के पद पर हैं। ग्रामीण विकास योजनाओं, पीएम आवास, मनरेगा, पोषण अभियान और प्राथमिक सुविधाओं के विस्तार में सीईओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नंदनवार का पूर्व अनुभव उन्हें इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाता है।—जिले की जमीनी हकीकत—25 साल बाद भी विकास की राह कठिनछत्तीसगढ़ गठन को 25 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन महासमुंद जिले में कई मूलभूत सुविधाएँ आज भी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाई हैं। खासकर सरायपाली-बसना क्षेत्र वर्षों से बेहतर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के स्थायी साधनों की मांग करता आ रहा है। आम नागरिकों का कहना है कि अब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी ने जिले के संभावित विकास में बाधा पहुंचाई है।—अब उम्मीदों का केंद्र—तीनों अफसरों की संयुक्त रणनीतिइन तीनों अधिकारियों का सबसे बड़ा सामर्थ्य यह है कि वे जिले को पहले से भली-भांति जानते हैं—कौन-सी योजना कहाँ अटकी है,किस क्षेत्र को तुरंत हस्तक्षेप की जरूरत है,किन समस्याओं की अनदेखी वर्षों से होती आ रही है,इसे समझने में इन्हें समय नहीं लगेगा। यही अनुभव अब जिले को तेज विकास की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।जिले के लोग उम्मीद जता रहे हैं कि यदि तीनों अधिकारी तालमेल के साथ योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करें तो महासमुंद पीछे से निकलकर एक विकसित और सशक्त जिले के रूप में पहचान बना सकता है।


