विकास नंद /सर्वव्यापी/
सरायपाली विकासखंड के ग्राम दीवानपाली, छिबरा, लखनपुर के सैकड़ों किसान पिछले 7–8 वर्षों से अपनी अधिग्रहित भूमि के मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। किसानों की कृषि भूमि जल संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2017–2018 में नहर–नाली निर्माण कार्य के लिए ली गई थी, लेकिन आज तक उन्हें भुगतान नहीं मिल पाया है।
किसानों का कहना है कि परियोजना के दौरान उनकी निजी कृषि भूमि स्थायी रूप से प्रभावित हुई, खेतों का बड़ा हिस्सा नहर निर्माण में चला गया, जिससे खेती योग्य क्षेत्र घटा और उत्पादन पर सीधा असर पड़ा। इसके बावजूद इतने वर्षों तक मुआवजा लंबित रहने से उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।पीड़ित किसानों ने बताया कि वे कई बार अनुविभागीय जल संसाधन कार्यालय, सरायपाली में आवेदन देकर दस्तावेजों की प्रतियां जमा कर चुके हैं। अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने के बावजूद न कोई स्पष्ट जवाब मिला, न ही समाधान। किसानों का कहना है कि वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा-लगा कर थक चुके हैं, परंतु राहत आज तक नहीं मिल सकी।
इधर, जल संसाधन विभाग सरायपाली के अधिकारी ने बताया कि विभागीय स्तर पर सभी प्रक्रियाएं वर्ष 2020–2021 में ही पूर्ण कर ली गई थीं और अधिग्रहित भूमि का मुआवजा जिले को आवंटित भी कर दिया गया था।
लेकिन सरकार की बदलती गाइडलाइन, तहसील कार्यालय में लंबित प्रकरण, और वर्षों से पदस्थ पटवारियों-आरआई तथा कार्यालयीन कर्मचारियों की धीमी कार्यशैली (कछुआ चाल) के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं।
किसानों ने बताया कि इतने लंबे समय से भुगतान अटका रहने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। भूमि प्रभावित होने से उत्पादन कम हुआ है और खेती-किसानी पर सीधा असर पड़ा है।
किसान प्रशासन से त्वरित जांच और मुआवजा वितरण प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराने की मांग कर रहे हैं।इस पूरे मामले पर जिला कलेक्टर विनय लंगेह ने संज्ञान लेते हुए किसानों को आश्वस्त किया है कि उनके प्रकरणों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने संबंधित पटवारी, आरआई और तहसील कार्यालय को प्रकरणों को शीघ्र जिला कार्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों के खातों में मुआवजा राशि जल्द से जल्द जमा कराई जा सके।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद किसानों ने उम्मीद जताई है कि वर्षों से लंबित यह मामला अब जल्द ही पटरी पर आएगा और उन्हें अपने अधिकार की राशि प्राप्त हो सकेगी।


