फेसबुक पोस्ट से उठा सियासी तूफ़ान: सुरज उपाध्याय बोले—एक आईएएस ने कांग्रेस खत्म की, अब दूसरा भाजपा को करेगा साफ! - Sarvavyapi फेसबुक पोस्ट से उठा सियासी तूफ़ान: सुरज उपाध्याय बोले—एक आईएएस ने कांग्रेस खत्म की, अब दूसरा भाजपा को करेगा साफ! - Sarvavyapi

फेसबुक पोस्ट से उठा सियासी तूफ़ान: सुरज उपाध्याय बोले—एक आईएएस ने कांग्रेस खत्म की, अब दूसरा भाजपा को करेगा साफ!

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक फेसबुक पोस्ट ने अचानक हलचल मचा दी है। सुरज उपाध्याय नामक व्यक्ति द्वारा अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखी गई एक टिप्पणी ने सत्ता और विपक्ष दोनों को असहज कर दिया है। सुरज ने लिखा-“एक आईएएस जोगी ने कांग्रेस को निपटाया… अब फिर एक आईएएस ओपी भाजपा को निपटाएगा, ये पक्का है।”यह एक लाइन राजनीतिक संकेतों से भरी है और प्रदेश में प्रशासन–राजनीति के रिश्तों को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है। इस पूरे विवाद में अब बड़ा मोड़ यह जुड़ गया है कि सुरज उपाध्याय के अनुसार ‘ओपी कोई आईएएस नहीं बल्कि भाजपा सरकार के वित्त मंत्री हैं।’ इस खुलासे ने बयान का राजनीतिक भार कई गुना बढ़ा दिया है।सुरज उपाध्याय की पोस्ट तीन बड़े राजनीतिक संकेत देती है।पहला—उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए दिवंगत अजीत जोगी को ‘आईएएस जोगी’ के तौर पर पेश कर कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घावों को फिर उभारा।दूसरा—उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए यह दावा किया कि भाजपा को कमजोर करने का काम अब “ओपी” करेंगे, जो कि एक अधिकारी नहीं बल्कि वर्तमान वित्त मंत्री हैं।तीसरा—उनकी टिप्पणी भाजपा के संगठन में पहले से मौजूद असंतोष और शक्ति संघर्ष की चर्चाओं को खुलकर सामने लाती दिख रही है। पार्टी के भीतर लंबे समय से प्रशासनिक दखल और कुछ प्रभावी चेहरों की कार्यशैली को लेकर दबे स्वर में नाराज़गी जताई जाती रही है।इस पोस्ट ने भाजपा खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है। कार्यकर्ता और पदाधिकारी यह समझने की कोशिश में हैं कि सुरज उपाध्याय का यह दावा किस आधार पर है और क्यों वित्त मंत्री को इस संदर्भ में जोड़ा गया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इसे भाजपा की कमजोर होती राजनीतिक पकड़ और आंतरिक असंतुलन का प्रमाण बताकर सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं।सोशल मीडिया के इस दौर में एक लाइन भी बड़ा राजनीतिक भूचाल ला सकती है। सुरज उपाध्याय की यह टिप्पणी अब सीधे छत्तीसगढ़ की सत्ता–सियासत के केंद्र में है। आने वाले दिनों में सरकार, भाजपा संगठन और स्वयं वित्त मंत्री की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद यहीं थमेगा या और बड़ा तूफ़ान बनेगा।


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