तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार दो वर्ष पूरे कर चुकी है, लेकिन सच्चाई यह है कि अब तक न जनता और न ही भाजपा कार्यकर्ता सरकार से वह दृश्यमान प्रभाव महसूस कर पाए हैं जिसकी उम्मीद थी। प्रशासनिक हलकों में ऊर्जा की कमी, राजनीतिक नियुक्तियों में देरी, योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती, और उद्योग–निवेश में ठहराव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में अगले तीन वर्षों का पूरा खेल अब सिर्फ तीन चेहरों—मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्य सचिव विकास शील—की तिकड़ी के हाथों में आ गया है। यदि यह तिकड़ी अब भी आक्रामक, तेज़ और जमीन पर दिखने वाली रणनीति नहीं अपनाती, तो 2028 में सरकार वोट मांगने सिर उठाकर नहीं, बल्कि सवालों के बोझ के साथ जाएगी।बीते दो वर्षों में मुख्यमंत्री का सीमित फील्ड विज़िट और अपेक्षाकृत शांत नेतृत्व शैली चर्चा में रही है। आने वाले समय में उन्हें “सीएम ऑन ग्राउंड” मॉडल पर काम करना होगा—हर 10–12 दिन में एक जिला दौरा, अचानक निरीक्षण, जनता की शिकायतों का स्थल पर निराकरण और फील्ड अफसरों की सख्त जवाबदेही तय करना। मुख्यमंत्री का एक्टिव मोड में आना पूरी सरकार के लिए टॉनिक की तरह होगा।मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को अब राज्य की “रणनीतिक नींव” मजबूत करनी होगी। आगामी तीन वर्षों के लिए प्रत्येक विभाग का 90 दिन का एक्शन प्लान, राजनीतिक नियुक्तियों का तत्काल ब्लूप्रिंट, धान–टोकन–उपार्जन की संकटमुक्त नीति, और उद्योग–निवेश के लिए Single Window 2.0—ये सारे निर्णय सरकार की छवि में रातों–रात बदलाव ला सकते हैं। मुख्यमंत्री की नीतिगत दिशा को पूरी तरह स्पष्ट करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर है।मुख्य सचिव विकास शील को “कार्यान्वयन का कप्तान” बनने के लिए अब पहले से अधिक कठोर होना पड़ेगा। योजनाएं तभी जमीन पर दिखेंगी जब जिलों की परफॉर्मेंस रैंकिंग नियमित बनेगी, फाइल–परियोजना–योजना की समयबद्ध समीक्षा लागू होगी और लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई होगी। मुख्य सचिव का मजबूत प्रशासनिक रुख ही पूरे सिस्टम में करंट डाल सकता है।दो साल तक भाजपा कार्यकर्ताओं को सिर्फ इंतज़ार मिला। अब यह तिकड़ी सबसे पहले राजनीतिक नियुक्तियों पर निर्णय लेकर संदेश दे सकती है कि “सरकार चल रही है और पूरी गति से चल रही है।” संसदीय सचिवों की नियुक्ति, निगम–मंडल अध्यक्षों का गठन और विभिन्न बोर्ड–प्राधिकरणों का पुनर्गठन सरकार में राजनीतिक ऑक्सीजन भरने का काम करेगा।किसान–केंद्रित सुधारों पर यह तिकड़ी जितना फोकस करेगी, सरकार की आधी छवि वहीं सुधर जाएगी। टोकन सिस्टम में सुधार, समय पर धान खरीदी–भुगतान, नहरों का पुनर्निर्माण और रबी–खरीफ योजनाओं की स्पष्ट टाइमलाइन… यदि मुख्यमंत्री प्रत्यक्ष समीक्षा करें, सुबोध कुमार सिंह नीति बनाएं और विकास शील उसके क्रियान्वयन की निगरानी करें तो किसान मुद्दा सरकार के पक्ष में बड़ा हथियार बन सकता है।उद्योग–निवेश के मामले में मुख्यमंत्री की स्पष्ट स्टेटमेंट, प्रमुख सचिव की नीति और मुख्य सचिव की मासिक मॉनिटरिंग—यह तिकड़ी गेमचेंजर साबित हो सकती है। छत्तीसगढ़ में मेगा प्रोजेक्ट का ठहराव सिर्फ जनता नहीं, उद्योग जगत भी महसूस कर रहा है। हर जिले में एक बड़ा निवेश प्रोजेक्ट, 1 लाख रोजगार लक्ष्य और उद्योग विभाग की सीएम स्तरीय नियमित समीक्षा—ये कदम सरकार की विकासवादी छवि को मजबूत कर सकते हैं।सरकारी योजनाओं का श्रेय जनता तक अब दिखाई देना चाहिए। कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन जनता तक उनकी मौजूदगी नहीं पहुँच रही। सीएम की घोषणाओं का तेज़ क्रियान्वयन, प्रमुख सचिव स्तर पर पॉलिसी ब्रांडिंग, और मुख्य सचिव स्तर पर जिलों में योजनाओं की दृश्यमान स्थापना—इन तीन स्तरों पर फोकस जरूरी है।सरकार की सबसे कमजोर कड़ी इस समय उसका संचार तंत्र है। मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव और मुख्य सचिव को मिलकर एक संयुक्त संचार सेल बनानी चाहिए, जो सरकारी कामों का त्वरित प्रचार, सोशल मीडिया पर फास्ट रिस्पॉन्स और विपक्ष के दावों का तथ्य आधारित जवाब दे सके। आज स्थिति यह है कि सरकार करती कुछ है और जनता तक पहुँचता कुछ भी नहीं।आदिवासी, युवा और महिला—ये तीन वोट बैंक छत्तीसगढ़ की राजनीति की धुरी हैं। इनके लिए विशेष ‘फोकस्ड स्कीम ट्रायो’ तैयार कर सीएम की प्रत्यक्ष निगरानी में लागू करना होगा। आदिवासी क्षेत्रों में वनधन प्लस और ई–वन उत्पाद, युवाओं के लिए स्टार्टअप + स्किल अपग्रेड स्कीम और महिलाओं के लिए आर्थिक प्रोत्साहन जैसी लक्षित योजनाएं सरकार को सीधे इन तबकों तक जोड़ सकती हैं।अब बड़े फैसलों का समय है। छवि वही बदल पाती है जो जोखिम लेती है। 10 हाई–प्रोफाइल भ्रष्टाचार कार्रवाइयां, बड़े घोटालों की पुनर्समीक्षा, कलेक्टर–एसपी स्तर पर व्यापक तबादले और आवास–सड़क–शिक्षा–स्वास्थ्य में 10 बड़े एलान—ये कदम साय सरकार को “बहादुर और निर्णायक सरकार” की पहचान देंगे।साय सरकार के दो साल बेहद शांत बीते हैं, लेकिन आने वाले तीन साल तूफ़ानी बनाए जा सकते हैं—अगर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उनके प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और मुख्य सचिव विकास शील मिलकर एक साहसी, तेज़ और जमीन पर दिखने वाली रणनीति अपनाते हैं। आने वाले चुनाव में भाजपा सरकार वोट मांगने जाएगी,सर पर बोझ लेकर या सिर उठाकर,यह पूरी तरह इसी तिकड़ी पर निर्भर करेगा।


