विकास नंद/सर्वव्यापी/
सरायपाली विकासखंड में ठंड का मौसम समाप्त भी नहीं हुआ है और गर्मी का आगमन भी बाकी है, लेकिन इसके बावजूद पेयजल आपूर्ति को लेकर आमजन की परेशानी अभी से शुरू हो चुकी है। क्षेत्र में इन दिनों खरीफ फसल की कटाई जोरों पर चल रही है, वहीं रबी सीजन की तैयारी भी तेजी से हो रही है। किसानों द्वारा सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर बोर खनन कराया जा रहा है, जो चिंता का बड़ा कारण बनता जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भूमिगत जल स्रोतों के लिए बोर खनन मनमाने तरीके से हो रहा है, जिसके चलते भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न होना तय है। विशेषज्ञ भी चेतावनी दे रहे हैं कि अनियोजित और अत्यधिक बोर खनन से गर्मी के महीनों में नल-जल और हैंडपंप दोनों ही सूखने की नौबत आ सकती है।जनप्रतिनिधि और ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि रबी फसल की सिंचाई और बोर खनन पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण के लिए ठोस नीति बनाई जाए। यदि शासन-प्रशासन समय रहते इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाता, तो आने वाली गर्मी में सरायपाली क्षेत्र को भारी पेयजल संकट से जूझना पड़ सकता है।स्थानीय लोगों ने बोर खनन पर निगरानी और भू-जल संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की है, ताकि आने वाले महीनों में पेयजल व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।


