तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ सरकार में नए संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री बने राजेश अग्रवाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती है—राज्य की समृद्ध विरासत, लोक संस्कृति, पुरातत्व और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय मंच पर वह पहचान दिलाना, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। छत्तीसगढ़ की संस्कृति हजारों वर्षों की गौरवशाली यात्रा का परिचय देती है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन के कारण यह राष्ट्रीय स्तर पर वह स्थान हासिल नहीं कर पाई, जो मिलना चाहिए था।मंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही अग्रवाल ने संकेत दिए हैं कि वे ‘नया छत्तीसगढ़, नया पर्यटन मिशन’ की अवधारणा पर काम करेंगे, जिसमें सिरांगढ़ से लेकर बस्तर, सिरपुर से लेकर डोंगरगढ़ तक की सांस्कृतिक विरासत को हाईलाइट करने की बड़ी योजना शामिल है। छत्तीसगढ़ की लोक कलाएँ—पंथी, सुवा, रौमा, करमा, बस्तर धमार—और यहां के आदिवासी हस्तशिल्प दुनियाभर में आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं, बशर्ते उन्हें आधुनिक मार्केटिंग और अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म मिले।राजेश अग्रवाल के सामने चुनौती केवल पर्यटन बढ़ाने की ही नहीं है, बल्कि संस्कृति को संरक्षित करते हुए उसे जन-जन तक पहुँचाने की भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंत्री अपने शुरुआती 100 दिनों में ठोस कदम उठाते हैं, तो छत्तीसगढ़ संस्कृति–पर्यटन मानचित्र पर देश का ‘नेक्स्ट हॉटस्पॉट’ बन सकता है।अब पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राजेश अग्रवाल अपनी निर्णायक कार्यशैली और नई सोच के बल पर छत्तीसगढ़ को वह राष्ट्रीय पहचान दिला पाएंगे, जिसका सपना वर्षों से अधूरा है।


