विकास नंद/सर्वव्यापी/
इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय में अध्ययनरत कृषि स्नातक के सप्तम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने ग्रामीण कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि, ग्रामीण, सामाजिक एवं आर्थिक गतिविधियों से संबंधित व्यापक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण पंजाब नेशनल बैंक कृषक प्रशिक्षण संस्थान, लाभांडी में प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि की पारंपरिक एवं आधुनिक तकनीकों से अवगत कराते हुए उन्हें आजीविका एवं स्वरोजगार के लिए तैयार करना था।प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के निदेशक तुषार सरोते के कुशल निर्देशन में किया गया। तुषार सरोते ने प्रशिक्षण की उपयोगिता एवं संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कृषि हमारे जीवन का आधार स्तम्भ है और इसकी आवश्यकता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। आधुनिक कृषि में अपार संभावनाएँ हैं, आवश्यकता केवल इन संभावनाओं की पहचान कर सही दिशा में चयन करने की है।प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ रामभरत ओझा द्वारा विद्यार्थियों को कृषि से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों पर गहन मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कृषि से संबंधित प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को बीज चयन, वैज्ञानिक ढंग से बुवाई, फसल संरक्षण की आधुनिक विधियाँ, मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण तथा बोनसाई पौधे तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। इसके साथ ही बागवानी के अंतर्गत जैम, स्क्वैश एवं अचार जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण की प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया गया।कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से आजीविका आधारित स्वरोजगार स्थापित करने की विस्तृत जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश शुक्ला द्वारा प्रदान की गई, जिससे विद्यार्थियों को कृषि को व्यवसाय के रूप में देखने की नई दृष्टि प्राप्त हुई।उपरोक्त विषयों को और अधिक प्रभावी ढंग से समझने हेतु विद्यार्थियों ने राज्य सरकार द्वारा संचालित समुदाय आधारित प्रशिक्षण केंद्र का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न उत्पादों के निर्माण, प्रसंस्करण एवं विपणन की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा, जिससे उनके व्यावहारिक ज्ञान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ शासन उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक प्रतिभा सोनी ने महाविद्यालयीन छात्रों को संबोधित करते हुए कृषि पाठ्यक्रम की उपयोगिता, भविष्य की संभावनाओं तथा खाद्य प्रसंस्करण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध खाद्य उत्पाद तैयार कर उन्हें हर घर तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है, साथ ही इससे रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं।कार्यक्रम के समापन सत्र में उद्यानिकी विभाग के अधिकारी यशवंत ठाकुर एवं नीतू साहू विशेष रूप से उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हुआ, जिससे उनमें कृषि आधारित स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की भावना का विकास हुआ। कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यालय सहायक श्रवण निर्मलकर का सराहनीय सहयोग रहा।