मरवाही/सीता बनाफर/ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर के स्थापना का उद्देश्य ही था कि राज्य के दूरवर्ती इलाकों में शिक्षा से वंचित समूहों के लिए दूरस्थ शिक्षा प्रणाली द्वारा विद्यार्थियों को ज्ञानदान, समर्थवान और कुशल बनाना l आज दूरस्थ शिक्षा पद्धति को शिक्षा के क्षेत्र में सपनों को साकार करने वाली वैज्ञानिक पद्धति के रूप में जाना जाता है l उच्च शिक्षा जीवन की गुणवत्ता के लिए जहां जरूरी है, वहीं इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह जन सामान्य के पहुंच से अभी भी दूर है l कुछ ऐसा ही हाल वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र मरवाही में देखने को मिल रहा है, जहां कई सालों से हजारों लोगों को उच्च शिक्षा मुहैया कराने वाला पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र 10 सालों से बंद पड़ा है और सैकड़ो लोग प्रतिवर्ष उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं l आंचल में मुक्त विश्वविद्यालय की जरूरत आखिर क्यों?- मरवाही विकासखंड जनजाति बहुल पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण यहां की अधिकतर छात्र- छात्राएं घरेलू या आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं l घरेलू, कामकाजी, व्यवसायी और नौकरीपेसा लोगों के लिए भी खुला मुक्त विश्वविद्यालय वरदान था l लेकिन इसके बंद होने से लोगों में आक्रोश है lअध्ययन केंद्रों में संचालित प्रमुख पाठ्यक्रम – सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से डीसीए, पीजीडीसीए, बीएससी, एमएससी, बीकॉम, ऍम काम, बीए, एमए, बी-लिब, एमएसडब्ल्यू, डीवायएस, बीबीए जैसी अनेकों डिग्री, डिप्लोमा शामिल हैं lमरवाही में संचालित अध्ययन केंद्र का संचालन- वर्ष 2016 से पूर्व शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मरवाही में किया जा रहा था l जिसे 2016 के बाद हटाकर गौरेला के माधवराव सप्रे महाविद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है l शिफ्ट करने का कोई ठोस कारण नहीं है क्योंकि शिक्षार्थियों की कमी मरवाही में कभी नहीं थी lवर्तमान अध्ययन केंद्र की दूरी अधिक- होने के कारण मरवाही के दूरस्थ ग्रामों के शिक्षार्थी प्रवेश लेने से वंचित हो रहे हैं l अन्य जिलों की भांति जीपीएम जिले में भी दोनों ब्लॉक में अध्ययन केंद्र संचालित हो l जिससे अंचल के लोगों को भी इसका लाभ मिल सके lकम्प्यूटर डिग्री-डिप्लोमा के नाम पर लगातार छात्रों के साथ धोखाधड़ी- वर्तमान समय कंप्यूटर और एआई का युग है l जिसके कारण हर वर्ग के लोगों को तकनीकी कार्यों के लिए कम्प्यूटर शिक्षा जरूरी है l अध्ययन केंद्र बंद होने से ग्रामीण अंचल के भोले-भाले गरीब लोग आसानी से कई फर्जी प्राइवेट कंप्यूटर सेंटर वालों के झांसे में आकर अपना कैरियर और पैसा दोनों से हाथ धो बैठते हैं l फर्जी कम्प्यूटर सेंटर संचालक पूरा पैसा जमा कराने के बाद भी छात्र-छात्राओं को डिग्री-डिप्लोमा की अंक सूची नहीं दे पाते या फिर ऐसे अंक सूची दिए जाते हैं जो की प्राइवेट या शासकीय नौकरी के लिए अमान्य होते हैं l अध्ययन केंद्र के बंद होने के बाद मरवाही में कई फर्जी मामले सामने आ चुके हैं जबकि सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय संचालित होते समय अधिकतर विद्यार्थी यहीं अपना प्रवेश लेते थे l बहरहाल देखना यह होगा कि सर्वव्यापी में खबर प्रकाशित होने के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन आगे क्या सकारात्मक पहल करती है l