तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में नगर सैनिक होमगार्डों के साथ हो रहे कथित शोषण के खिलाफ उभरा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। वर्षों से उपेक्षा, अनियमित मानदेय, असुरक्षित कार्यस्थितियों और अधिकारों की अनदेखी से त्रस्त नगर सैनिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। इसी संघर्ष की चिंगारी बने तीजाउ राम मांडवी की कुर्बानी ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।नगर सैनिकों का स्पष्ट कहना है कि तीजाउ राम मांडवी का बलिदान केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि व्यवस्था की असंवेदनशीलता पर करारा तमाचा है। नगर सैनिकों ने ऐलान किया है कि जब तक शोषण के दोषियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाती और होमगार्डों को उनका वैधानिक हक नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन थमेगा नहीं।होमगार्ड जवानों का आरोप है कि नगर सैनिकों से नियमित कर्मियों जैसा काम लिया जा रहा है, लेकिन न तो स्थायित्व है, न सम्मानजनक वेतन और न ही सामाजिक सुरक्षा। कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करने के बावजूद उन्हें सिर्फ “अस्थायी” मानकर नजरअंदाज किया जाता रहा है। तीजाउ राम मांडवी की कुर्बानी ने इस अन्याय को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है।वहीं आंदोलन के नेताओं ने दो टूक कहा है कि यह लड़ाई अब सम्मान और अधिकार की है। यदि सरकार ने समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिए, तो आंदोलन और तेज होगा। प्रदेशभर में नगर सैनिकों के बीच एकजुटता बढ़ रही है और साफ संदेश दिया जा रहा है, तीजाउ राम मांडवी की कुर्बानी जाया नहीं जाएगी, शोषण के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई होकर रहेगी।