संपादक के कलम से… कड़वा सच ल जियावत कर दिस अजय चंद्राकर ह।

Share Now

तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के राजनीति म एक कड़वा सच ल जियावत कर दे हवय पूर्व मंत्री अउ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर के कथन – “भ्रष्टाचार अउ मोहब्बत कभू खत्म नई होवय, सिरिफ बाबू बदले जाथें।” ये लाइन सिरिफ तंज नई, बल्कि पूरा सिस्टम के एक्स-रे आय।राज्य म सरकार बनथे, गिरथे, मंत्री बदल जाथें, नवा नवा नारा लगथे, फेर दफ्तर के भीतर के दुनिया म कुछो नई बदलय। फाइल उही टेबल म अटक जाथे, काम उही ढर्रा म चलथे, अउ बिना लेन-देन के जनता के काम आगे नई बढ़य। बाबू बदले जाथें, फेर सोच अउ चाल-ढाल उही रहिथे।सत्ता अउ बाबूशाही के बीच एक अघोषित समझौता चलत रहिथे। सरकार चाहथे “सब ठीक हे” के संदेश जाय, अउ बाबू चाहथें अपन सुविधा। एखरे बीच पिसत रहिथे आम जनता-जेन ला हर काम बर दफ्तर के चक्कर काटना परथे।योजना कागज म जनकल्याणकारी होथे, भाषण म ऐतिहासिक बताय जाथे, फेर जमीन म पहुंचत-पहुंचत ओकर आत्मा निकल जाथे। गरीब के हक फाइल म दब जाथे अउ दलाल सिस्टम के हिस्सा बन जाथें।ये घलो सच आय के सिस्टम म ईमानदार अधिकारी आज घलो हवंय, फेर ओमन या तो कोना म डाल दे जाथें या त परेशान होके चुप बैठ जाथें। जेन मन “सेटिंग” म माहिर रहिथें, ओमन हर सरकार म सुरक्षित रहिथें। एखरे से भ्रष्टाचार के बीमारी पुरानी होके घलो जिन्दा हे।अजय चंद्राकर के बयान सरकार अउ प्रशासन दूनों बर चेतावनी आय। अगर सच म बदलाव चाही, त सिरिफ बाबू बदलना काफी नई- नीयत, नीति अउ निगरानी तीनों बदले बिना सिस्टम सुधरही नई।अब देखना ये आय के ये बात घलो बाकी बयान जइसे हवा म उड़े जाही, कि फेर कभी सिस्टम खुद अपन परछाईं देख के सच म सुधरही।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!