संपादक के कलम से…“विष्णु जी, पाँच साल मुख्यमंत्री रहेंगे— मुझसे किजिए संवाद।

Share Now

तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक तीखा सवाल गूंज रहा है—क्या सत्ता के शीर्ष पर बैठा नेतृत्व जनता से संवाद करने का साहस खो रहा है? मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को लेकर उठे ताज़ा आरोप केवल एक व्यक्ति की नाराज़गी नहीं, बल्कि शासन की संवादहीनता पर गहरी टिप्पणी हैं।आरोप है कि मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के लिए लगातार व्हाट्सएप, ई-मेल और टेलीफोन के माध्यम से समय मांगा गया, लेकिन जवाब के नाम पर चुप्पी ही मिली। यह चुप्पी तब और अधिक खटकती है, जब मुख्यमंत्री स्वयं पाँच वर्षों तक स्थिर और मजबूत शासन का दावा करते हैं। सवाल सीधा है—यदि नेतृत्व में दम है, तो जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मिलने में हिचक क्यों?मुलाक़ात चाहने वालों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक शिकायतों को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखना है। बावजूद इसके, न तो स्पष्ट ‘हाँ’ मिली, न ‘ना’। यह असमंजस लोकतंत्र की आत्मा—संवाद—को कमजोर करता है।लोकतांत्रिक व्यवस्था में मुख्यमंत्री का दायित्व केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करना या मंचों से भाषण देना नहीं होता। जनप्रतिनिधि होने का अर्थ है जनता की बात सुनना, असहमति को जगह देना और सवालों का सामना करना। जब महीनों तक मिलने के अनुरोध अनसुने रह जाते हैं, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर नहीं, बल्कि सत्ता के अहंकार पर उंगली उठाता है।यही कारण है कि आज आम जनता के बीच यह धारणा गहराने लगी है कि सत्ता का केंद्र ज़मीनी हकीकत से कटता जा रहा है। सचिवालय और मुख्यमंत्री निवास की दीवारें इतनी ऊँची हो चुकी हैं कि जनता की आवाज़ भीतर तक पहुँच ही नहीं पा रही।“दम है तो मुझसे मिलिए” कोई व्यक्तिगत चुनौती नहीं, बल्कि लोकतंत्र में संवाद की मांग है। इस मांग को नज़रअंदाज़ करना केवल एक मुलाक़ात टालना नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को ठेस पहुँचाना है।अब निगाहें मुख्यमंत्री कार्यालय पर टिकी हैं। क्या इस चुप्पी को तोड़कर संवाद का दरवाज़ा खुलेगा? या फिर यह सवाल भी सैकड़ों फाइलों, अपठित संदेशों और अनसुने कॉल्स के बीच दबकर रह जाएगा?क्योंकि लोकतंत्र में खामोशी भी अपने आप में एक जवाब होती है,और अक्सर वह जवाब सबसे ज़्यादा बेचैन करने वाला होता है।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!