तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

बिलासपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक शिकायत के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद जायसवाल को निलंबित कर दिया गया, लेकिन इसी बीच छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों और कथित साक्ष्यों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवालों को जन्म दे रहा है।सूत्रों के अनुसार, डीएसपी कल्पना वर्मा के विरुद्ध विभिन्न स्तरों पर शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें कार्यशैली, अधिकारों के दुरुपयोग और अन्य गंभीर आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़ और साक्ष्य भी संबंधित विभागों तक पहुंचाए हैं। इसके बावजूद न तो औपचारिक जांच की घोषणा हुई है और न ही कोई प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है।इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि गृह मंत्री विजय शर्मा की चुप्पी क्यों है? जब एक मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एएसपी को निलंबित किया गया, तो समान या उससे भी गंभीर बताए जा रहे आरोपों पर दूसरे अधिकारी के मामले में दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है। यह सवाल आमजन से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गूंज रहा है।प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि निष्पक्ष शासन व्यवस्था में शिकायतें किसी भी स्तर की हों, उन पर समान रूप से जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। चयनात्मक कार्रवाई न केवल पुलिस विभाग की छवि पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर भी संदेह पैदा करती है।अब देखना यह है कि क्या गृह विभाग डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ आई शिकायतों पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच के आदेश देता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, जवाबदेही और पारदर्शिता के दावे सवालों के घेरे में हैं।