जन औषधि केंद्रों में जेनेरिक दवाओं, सर्जिकल आइटम और सेनेटरी पैड की किल्लत, स्वास्थ्य विभाग भी प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स पर निर्भर।

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही /सीता बनाफर /सर्वव्यापी /

दिल्ली से जीपीएम जिले में वर्तमान में पांच प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र रजिस्टर्ड हैं, फिर भी मरीजों और आम लोगों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही है l जिसके कारण मरीजों को महंगे ब्रांडेड दवाएं खरीदने में अपनी जेबें ढीली करनी पड़ती है, प्राइवेट मेडिकल स्टोर से महंगे दवाई नहीं खरीद पाने से कई बार मरीजों की बीमारियां बढ़ जाती है और उनकी जान तक चली जाती है l महिलाओं को सस्ते दर पर सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं अस्पताल के डॉक्टर भी सर्जिकल आइटम के लिए प्राइवेट मेडिकल स्टोर्स पर निर्भर हैं lक्या है पीएम जन औषधि केंद्र ? – प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना केंद्रीय औषधि के उपक्रमों के सहयोग से औषधि विभाग द्वारा शुरू किया गया एक अभियान है l जिसका उद्देश्य है ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र’ नामक समर्पित दुकानों के माध्यम से जनता को सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण दवाई उपलब्ध कराना l जेनेरिक दवा क्या है ? -जेनेरिक दवाओं का विपणन स्वामित्व या ब्रांड नाम के बजाय गैर स्वामित्व या अनुमोदित नाम के तहत किया जाता है l जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड समकक्षों की तुलना में समान रूप से प्रभावी और 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं lसस्ते सेनेटरी पैड महिलाओं व स्कूल-कालेज छात्राओं के लिए कितना जरूरी- देश की आधी आबादी महिलाओं के लिए बनाए गए नियम-कायदे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं l केंद्र और राज्य सरकारें जहां महिला उत्थान की गिनती-गिनाते नहीं थकते, वहीं जमीनी स्तर पर जन औषधि केंद्रों में उन्हें सस्ते सेनेटरी पैड तक मुहैया नहीं हो पा रहे हैं l प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर जहां पैड रुपये 35 से 40 में मिलते हैं वहीं जन औषधि केंद्रों पर इसकी कीमत महज 10 से 15 रुपए तक होती है, लेकिन जिले को मिलने वाली सेनेटरी पैड की सीधे कालाबाजारी स्वास्थ्य विभाग के नाक के नीचे होती है l सेनेटरी पैड उपयोग नहीं करने से इन्फेक्शन के कारण जिले में हजारों महिलाएं प्रति वर्ष गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, वहीं पीरियड के दौरान महिलाओं को सामाजिक बुराइयों, दर्द, खून की कमी और भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है l इसके बाद भी मरीज महिलाओं तक को सस्ते पैड उपलब्ध नहीं हो पा रही है l गांव के एक घर में तीन से पांच तक महिलाएं होती है आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में सबके लिए महंगे सेनेटरी पैड खरीद पाना मुश्किल होता है l ट्राइबल जिला जीपीएम में हाई स्कूल – कॉलेज तक के छात्राओं को भी जन औषधि केंद्रों पर सस्ते सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं l जिला अस्पताल परिसर में संचालित जन औषधि केंद्र संचालक का दावा है कि वह सप्लाई में प्राप्त होने वाले पैड्स को स्कूलों में दे देते हैं l लेकिन उनके पास इसके कोई रिकार्ड मौजूद नहीं हैं l केंद्र में ग्राहक मरीजों को कोई बिल भी प्रदान नहीं किया जाता है lदिल्ली से जीपीएम जिले में पांच जन औषधि केंद्र रजिस्टर्ड हैं लेकिन कहाँ-कहाँ संचालित हैं विभाग और आम जनता को भी जानकारी नहीं है जिसका बड़ा खुलासा सर्वव्यापी अपने आगामी अंक में करेगा।


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