एसआईआर प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर बढ़ा बोझ, प्रशिक्षण और संचार की कमी से आमजन परेशान।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

प्रदेश में मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से संचालित एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, पर्याप्त प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में यह प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है, जिससे इसकी कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि नाम जोड़ने, संशोधन कराने या अन्य पंजीयन संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों को बार-बार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे न केवल लोगों का समय और धन व्यर्थ हो रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव बन रहा है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया की समुचित जानकारी न होने के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सही मार्गदर्शन देने में असमर्थ हैं। कई मामलों में फार्म भरने, आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न करने और ऑनलाइन प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते आवेदन लंबित रह जा रहे हैं।विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि यदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चरणबद्ध प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और लिखित दिशा-निर्देश समय रहते उपलब्ध कराए जाएं, तो एसआईआर प्रक्रिया कहीं अधिक प्रभावी और सुचारू हो सकती है। इसके साथ ही मैदानी स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत करने और त्वरित समाधान व्यवस्था लागू करने से आम जनता को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सकती है।प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए, ताकि एसआईआर प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और जनहितैषी तरीके से पूरी की जा सके।


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