तरुण कौशिक/संपादक, सर्वव्यापी/
गणतंत्र दिवस सिरिफ झंडा फहराय के उत्सव नो हे, ये दिन देश अउ छत्तीसगढ़ के हालत ऊपर गहिरा सोच करे के मौका देथे, आज भारत दुनिया मं आगे बढ़त दिखत हे, पर भीतर राजनीति मं भरोसा कमजोर परत जात हे, सत्ता बदलथे फेर जनता के सवाल जस के तस बने रहिथे, वादा बहुत होथे पर जमीन मं असर कम दिखथे, छत्तीसगढ़ मं घलो सरकार बदलीस, पर बेरोजगारी, महंगाई, स्वास्थ्य अउ शिक्षा जइसन बुनियादी समस्या आज घलो आम आदमी ला घेरे हे, प्रशासन नियम-कायदा मं मजबूत दिखथे पर संवेदना मं कमजोर पड़ जाथे, फाइल दफ्तर मं घूमत रहिथे अउ गरीब आदमी न्याय अउ सुविधा खातिर भटकत रहिथे, उद्योग अउ विकास के नाम मं बड़े-बड़े प्रोजेक्ट आवत हें, खनिज अउ संसाधन भरपूर हे, फेर स्थानीय युवा के हाथ मं काम नइ पहुँचत, विकास के चमक शहर तक सिमट जाथे अउ गांव पीछे छूट जाथे, बेरोजगारी आज सबले बड़ा संकट बन गे हे, पढ़े-लिखे युवा खाली हाथ बइठे हें, सरकारी भर्ती सीमित हे, निजी क्षेत्र कमजोर हे अउ स्वरोजगार के मजबूत रास्ता आज घलो साफ नइ दिखथे, बेरोजगारी सिरिफ जेब के समस्या नो हे, ये मन के हताशा अउ समाज के असंतोष ला घलो बढ़ाथे, कानून किताब मं मजबूत हे पर न्याय पाना आज घलो संघर्ष बन गे हे, गरीब आदमी खातिर न्याय लड़ई आय अउ ताकतवर खातिर प्रक्रिया, कई इलाका मं डर अउ असुरक्षा के माहौल बने रहिथे, महिला सशक्तिकरण के नारा हर मंच मं गूंजथे पर जमीनी हकीकत मं महिला आज घलो असुरक्षित हे, भेदभाव अउ हिंसा झेलत हे, गांव के महिलाएं घर, खेत अउ समाज संभालथें फेर फैसला मं उनकी आवाज कमजोर रहिथे, सशक्तिकरण तब सच्चा होही जब महिला सुरक्षित, शिक्षित अउ आत्मनिर्भर होही, गणतंत्र हमन ला अधिकार देथे फेर जिम्मेदारी घलो सौंपथे, देश अउ छत्तीसगढ़ के बदलाव सरकार अकेले नइ कर सके, बदलाव तब आवथे जब जनता जागरूक बने, सवाल पूछे अउ जिम्मेदार नागरिक बने, ये गणतंत्र दिवस मं संकल्प लेन जरूरी हे कि हमन सिरिफ दर्शक नो बनबो, हमन संवेदनशील समाज बनाबो, न्यायपूर्ण छत्तीसगढ़ गढ़बो अउ मजबूत भारत के निर्माण मं अपन जिम्मेदारी निभाबो।जय भारत। जय छत्तीसगढ़।