विकास नंद/सर्वव्यापी/
प्राइवेट कंपनियों के उत्पादों के प्रचार-प्रसार के मायाजाल से शासकीय कर्मचारी आखिर कब मुक्त होंगे—यह सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। संविधान एवं शासन द्वारा निर्धारित सेवा नियमों की अवहेलना करते हुए कुछ शासकीय कर्मचारी प्राइवेट नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियों के लालच में आकर खुलेआम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उत्पादों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि शासकीय सेवक किसी भी प्रकार के निजी व्यापार, नेटवर्क मार्केटिंग अथवा प्राइवेट कंपनियों के प्रचार से दूर रहेंगे। इसके बावजूद सरायपाली क्षेत्र में कुछ जिम्मेदार शासकीय कर्मचारी इन नियमों को ताक पर रखकर सोशल मीडिया के माध्यम से निजी कंपनियों का प्रचार करते नजर आ रहे हैं।पूर्व में भी ऐसे मामलों में शासन द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाती रही है, लेकिन इसके बाद भी कुछ कर्मचारियों के रवैये में कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। यह न केवल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय पद की गरिमा और निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।सूत्रों के अनुसार, संबंधित प्राइवेट कंपनियों एवं शासकीय कर्मचारियों की भूमिका की तथ्यों सहित जांच कर उचित कार्रवाई की मांग को लेकर सक्षम अधिकारियों को पत्र सौंपा जाएगा। साथ ही पूरे मामले का समाचार माध्यमों के जरिए प्रकाशन कर आमजन को भी वास्तविकता से अवगत कराया जाएगा।अब देखना होगा कि शासन ऐसे मामलों में कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और शासकीय कर्मचारियों को नियमों के पालन के प्रति कितना गंभीर बनाता है।