वर्दी में जहर! संतोष पटेल की चीख से हिला छत्तीसगढ़—गृह मंत्री बेबस, अफसर बेलगाम; प्रदेशव्यापी आंदोलन की आहट।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर के गृह जिला कोरबा में जिला सेनानी एवं अग्निशमन विभाग में पदस्थ सैनिक संतोष पटेल द्वारा उच्च अधिकारियों की कथित प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी का प्रयास किया जाना महज एक घटना नहीं, बल्कि होम गार्ड विभाग में गहराते अफसरशाही आतंक का खौफनाक संकेत है। हैरानी की बात यह है कि इतना गंभीर मामला सामने आने के बावजूद वर्तमान गृह मंत्री विजय शर्मा अब तक कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहे हैं।घटना के बाद प्रशासन ने कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करते हुए कोरबा जिला सेनानी अनुप एक्का को हटाकर प्रशिक्षण केंद्र में संलग्न कर दिया, जबकि कोरबा जिले का अतिरिक्त प्रभार जांजगीर-चांपा व सक्ती की जिला सेनानी एवं अग्निशमन यंत्र विभाग की महिला कमांडेंट योग्यता साहू को सौंप दिया गया। सवाल यह है कि क्या केवल ट्रांसफर से आत्महत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराधों पर पर्दा डाला जा सकता है?इधर, कोरबा जिले के होम गार्ड जवानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। जवान धरने पर बैठकर दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जवानों का साफ कहना है कि जब तक प्रताड़ना करने वाले अफसरों पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा जाएगा, तब तक यह सिलसिला नहीं रुकेगा।सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि संतोष पटेल अकेला शिकार नहीं है।सूत्रों के अनुसार बिलासपुर, कवर्धा, राजनांदगांव और रायपुर सहित कई जिलों में होम गार्ड जवान लंबे समय से मानसिक, प्रशासनिक और सेवा संबंधी प्रताड़ना झेल रहे हैं। शिकायतें की जाती रहीं, लेकिन हर बार फाइलें दबी रहीं और अफसर बचते रहे।अब हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि कोरबा और राजनांदगांव की घटनाओं से सबक लेते हुए पूरे प्रदेश के होम गार्ड जवान एकजुट हो रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय धरना-प्रदर्शन की तैयारी अंतिम चरण में है, जिससे सरकार और गृह विभाग की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वर्दीधारी जवानों की जान की कीमत सिर्फ एक ट्रांसफर है? क्या गृह मंत्री विजय शर्मा अफसरों के आगे मजबूर हैं या सिस्टम जानबूझकर आंख मूंदे बैठा है?अगर समय रहते दोषियों पर एफआईआर, निलंबन और विभागीय कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


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