नूर मोहम्मद/ गौरेला पेंड्रा मरवाही/ (सर्वव्यापी)

छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन इसी ऐतिहासिक वर्ष में विष्णु सरकार के सरकारी कैलेंडर 2026 ने एक बड़ा राजनीतिक और भावनात्मक विवाद खड़ा कर दिया है। कैलेंडर में हर पेज पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोटो बड़े आकार में प्रमुखता से छापा गया है, जबकि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई जी का फोटो पूरी तरह गायब है।इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ की अस्मिता और पहचान की प्रतीक ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ को भी सम्मानजनक स्थान देने के बजाय, केवल एक कोने में छोटा सा चित्र देकर औपचारिकता निभा दी गई है।यह कैलेंडर है या आत्मप्रचार का दस्तावेज़?सरकारी कैलेंडर, जो आमतौर पर राज्य की संस्कृति, इतिहास और गौरव को दर्शाने का माध्यम होता है, उस पर हर पन्ने में वर्तमान सत्ता के शीर्ष चेहरों की मौजूदगी और राज्य निर्माता की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।जनता पूछ रही है क्या सरकारी कैलेंडर राज्य के इतिहास के लिए होता है या केवल सत्ता के प्रचार के लिए?1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का निर्माण स्व. अटल बिहारी वाजपेई के दूरदर्शी निर्णय का परिणाम है। आज उसी छत्तीसगढ़ में, उसी के रजत जयंती वर्ष में, सरकारी कैलेंडर से उनका नाम और चित्र गायब होना कई लोगों को ऐतिहासिक विस्मृति और अपमान जैसा लग रहा है।महतारी भी हाशिए परछत्तीसगढ़ महतारी, जो राज्य की आत्मा, संस्कृति और स्वाभिमान की प्रतीक हैं, उन्हें भी कैलेंडर में हाशिए पर डाल देना लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचा रहा है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि महतारी को कोने में और सत्ता को हर पन्ने पर यह संदेश बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।सरकार से जवाब की मांगअब प्रदेशभर में यह सवाल उठने लगे हैं, क्या यह केवल डिज़ाइन की चूक है या सोची-समझी अनदेखी?क्या रजत जयंती वर्ष में राज्य निर्माता को भुला देना उचित है?क्या सरकार संशोधित कैलेंडर जारी करेगी?रजत जयंती वर्ष में सामने आया यह मामला साफ संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ में इतिहास, अस्मिता और जनभावनाओं को लेकर गंभीर आत्ममंथन की आवश्यकता है, क्योंकि राज्य केवल वर्तमान से नहीं, अपने निर्माता और अपनी माटी से भी पहचाना जाता है।