धान का पैसा निकालने किसानों को हो रही परेशानी।

Share Now

तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

शासन द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी केंद्रों में व्यापक व्यवस्थाएं किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। धान बिक्री के बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला मुंगेली जिले के सेतगंगा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक से सामने आया है, जहां बैंक प्रबंधन की लापरवाही के कारण किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में किसान सुबह से ही अपने धान के भुगतान की राशि निकालने के लिए बैंक पहुंचे थे। बैंक का निर्धारित समय सुबह 10 बजे से है, लेकिन सुबह 10:45 बजे तक भी बैंक के ताले नहीं खुले थे। ठंड और समय की कमी के बावजूद किसान बैंक परिसर के बाहर खड़े होकर कर्मचारियों का इंतजार करते रहे। कई किसान दूर-दराज के गांवों से आए थे, जिनके लिए बैंक तक पहुंचना ही एक बड़ी चुनौती होती है। लगभग 11 बजे एक कर्मचारी बैंक पहुंचा, लेकिन उस समय तक भी अन्य अधिकारी एवं जिम्मेदार कर्मचारी नदारद रहे। बैंक खुलने में देरी के कारण किसानों में नाराजगी देखी गई। किसानों का कहना है कि वे खेती-किसानी छोड़कर अपने जरूरी कामों को स्थगित कर बैंक आते हैं, लेकिन यहां उन्हें सम्मानजनक व्यवहार और समय पर सेवा नहीं मिल पा रही है।किसानों ने बताया कि धान बेचने के बाद मिलने वाली राशि से उन्हें खाद-बीज, कृषि उपकरण, कर्ज भुगतान एवं पारिवारिक जरूरतें पूरी करनी होती हैं। बैंक खुलने में देरी और कर्मचारियों की अनुपस्थिति से उन्हें आर्थिक व मानसिक दोनों तरह की परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि बैंक में अक्सर इसी तरह की अव्यवस्था देखने को मिलती है। अपना ही पैसा पाने के लिए कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे मामले ने शासन की किसान हितैषी योजनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार समय पर भुगतान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर बैंक स्तर पर लापरवाही किसानों की परेशानी का कारण बन रही है। किसानों ने जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन से मांग की है कि बैंक संचालन समय का कड़ाई से पालन कराया जाए तथा दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसानों को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


Share Now

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page

error: Content is protected !!