विकास नंद /सर्वव्यापी/

शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के साथ ही महासमुंद जिला खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता की एक नई मिसाल बनकर सामने आया है।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के स्पष्ट निर्देश और सतत निगरानी के चलते जिले में अवैध धान भंडारण, परिवहन एवं खरीदी में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध जिस प्रकार की प्रभावी कार्रवाई की गई, वह अपने आप में एक रिकार्ड के रूप में देखी जा रही है।
पूरे धान खरीदी सत्र के दौरान कलेक्टर लंगेह द्वारा जिले के विभिन्न धान उपार्जन केन्द्रों तथा अंतर्राज्यीय जांच चौकियों पर लगातार औचक निरीक्षण किए गए। इन निरीक्षणों के दौरान अवैध रूप से धान खपाने वाले कोचियों, बिचौलियों एवं धान खरीदी केन्द्रों में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों पर कड़ी और त्वरित कार्रवाई की गई। प्रशासन की इस सख्ती से अवैध धान कारोबारियों में हड़कंप मच गया और पूरे तंत्र में अनुशासन स्थापित हुआ।जिले में की गई सघन जांच और निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप शासन को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान से बचाने में बड़ी सफलता मिली। साथ ही वास्तविक किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य पर लाभ सुनिश्चित हो सका। अवैध धान परिवहन पर रोक लगाने के लिए अंतर्राज्यीय सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, जिससे बाहरी धान की जिले में खपत पर प्रभावी अंकुश लगा।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की कार्यशैली—जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित निर्णय प्रमुख रहे—के कारण महासमुंद जिले में धान खरीदी की प्रक्रिया सुचारू, व्यवस्थित और विवाद-मुक्त रूप से संपन्न हुई। आम जनता, किसानों और जागरूक नागरिकों के बीच प्रशासन की इस कठोर लेकिन न्यायपूर्ण कार्रवाई की व्यापक सराहना की जा रही है।
धान खरीदी सत्र 2025-26 में महासमुंद जिले में अपनाया गया यह मॉडल आने वाले वर्षों के लिए एक उदाहरण के रूप में याद रखा जाएगा, जिसमें मजबूत इच्छाशक्ति और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण के माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी लगाम लगाते हुए शासन और किसानों—दोनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की गई।