तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2024–25 के अंतर्गत धान खरीदी की प्रक्रिया इस बार प्रशासनिक सख्ती और निगरानी के कारण कुल मिलाकर सफल मानी जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और सतत मॉनिटरिंग में राज्यभर के धान उपार्जन केंद्रों में व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई।धान खरीदी के दौरान जहां कई वर्षों से चले आ रहे अव्यवस्था, बिचौलियागिरी और फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगा, वहीं कुछ जिलों में सामने आए धान खरीदी घोटालों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की। इससे स्पष्ट संकेत गया कि इस बार सरकार और प्रशासन धान खरीदी में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
हालांकि, इसी बीच गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह जिला कबीरधाम में सामने आया कथित ‘चूहों ने धान खा लिया’ प्रकरण सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी और राजनीतिक-प्रशासनिक चुनौती बनकर उभरा है। करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य के धान के नुकसान को चूहों द्वारा खाए जाने का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश ने न केवल प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह मामला संभावित संगठित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।वहीं विपक्ष का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धान का नुकसान केवल चूहों के नाम पर नहीं टाला जा सकता। यह मामला भंडारण व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि समय रहते निष्पक्ष और कठोर जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रकरण सरकार की सुशासन की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।कुल मिलाकर, प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह की निगरानी में धान खरीदी प्रक्रिया को प्रशासनिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन कबीरधाम जैसे मामलों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि प्रणाली में अब भी ऐसे छेद हैं, जिनसे भ्रष्टाचार घुसपैठ कर सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी कसौटी यह है कि वह सफलता की इस तस्वीर को धूमिल करने वाले मामलों में कितनी सख्ती और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है।धान खरीदी में मिली सफलता तभी सार्थक मानी जाएगी, जब कथित ‘चूहा कांड’ जैसे मामलों की सच्चाई सामने लाकर दोषियों को बेनकाब किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए।