गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/नूर मोहम्मद/श्रीनिवास सुमेर/

कैम्पा मद अंतर्गत वनमार्ग निर्माण के नाम पर शासकीय राशि के गबन का गंभीर मामला सामने आया है। मरवाही वनमण्डल में पदस्थ तत्कालीन वनमण्डल अधिकारी रौनक गोयल, तत्कालीन उपवनमण्डल अधिकारी गौरेला आर.के. सिदार सहित अन्य अधिकारियों पर संगठित रूप से फर्जी प्रमाणक तैयार कर, कूटरचित हस्ताक्षर के माध्यम से 5,89,950 रुपये की राशि की बंदरबाट करने का आरोप लगाया गया है।मामला गौरेला परिक्षेत्र के ठेगाढांड परिसर अंतर्गत खोडरी से लक्ष्मणधारा वनमार्ग (लंबाई 01 किलोमीटर) में डब्ल्यू.बी.एम. सड़क निर्माण से जुड़ा है, जहाँ जे.सी.बी. मशीन से कड़ी मिट्टी की खुदाई एवं ट्रेक्टर से परिवहन दर्शाकर भुगतान किया गया, जबकि शिकायत के अनुसार वास्तविक रूप से कोई कार्य नहीं कराया गया।शिकायत में उल्लेख है कि तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी गौरेला नरेश चन्द्र देवनाग के कूटरचित हस्ताक्षर कर प्रमाणक तैयार किए गए। जिन तिथियों में कार्य दर्शाया गया है, उस अवधि में उनकी पदस्थापना गौरेला परिक्षेत्र में नहीं थी। अन्य प्रमाणकों से हस्ताक्षरों का मिलान करने पर भी स्पष्ट होता है कि प्रस्तुत हस्ताक्षर वास्तविक नहीं हैं।प्रमाणकों में गंभीर अनियमितताएँ पाई गई हैं। जे.सी.बी. मशीन के उपयोग की अवधि, कार्य के घंटे और मशीन नंबर का उल्लेख नहीं किया गया है। जे.सी.बी. ऑपरेटर की रीडिंग पर्ची संलग्न नहीं है। मिट्टी परिवहन में उपयोग किए गए ट्रेक्टर एवं ट्रॉली के नंबर, संख्या और अवधि का कोई विवरण नहीं है। संलग्न बिलों का उपवनमण्डल अधिकारी द्वारा सत्यापन नहीं किया गया तथा प्रमाणक और बिल में दर्शाई गई तिथियाँ एवं हस्ताक्षर संदेहास्पद हैं।इन फर्जी प्रमाणकों के आधार पर विष्णु प्रसाद अग्रवाल, बिलासपुर को जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टर कार्य के नाम पर 5.89 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जिसे वनमण्डल कार्यालय के लेखा में समायोजित किया गया।शिकायतकर्ता द्वारा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हेतु तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की मांग की गई है। जांच पश्चात् दोषी पाए जाने पर रौनक गोयल और आर.के. शिदार के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कर गबन की राशि शासकीय खजाने में वसूलने तथा कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।जांच के दौरान कैम्पा मद से संबंधित स्वीकृत प्राकलन, समस्त प्रमाणक, संलग्न बिल, मजदूर सूची, रॉयल्टी पर्ची, सामग्री आपूर्ति एवं मशीनरी कार्य से संबंधित फर्म चयन दस्तावेज, डिस्पैच रजिस्टर, प्रपत्र-3 तथा जनवरी 2024 से अप्रैल 2025 तक के बैंक स्टेटमेंट और वाउचर वेरिफिकेशन रिपोर्ट तलब कर प्रत्येक अधिकारी, कर्मचारी एवं मजदूर का बयान लिए जाने की मांग की गई है।शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में अक्सर केवल औपचारिक जांच कर फाइलें वर्षों तक लंबित रख दी जाती हैं। पूर्व में जारी जांच संबंधी आदेशों और दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए इस मामले की सूक्ष्म एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।इस गंभीर मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील तथा अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ऋचा शर्मा के नाम ज्ञापन पत्र सौंपा गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की जाए तथा की गई कार्रवाई की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए।अब देखना यह है कि शासन इस मामले में केवल औपचारिक जांच तक सीमित रहता है या फिर कैम्पा मद में हुए कथित संगठित गबन पर वास्तविक और उदाहरणात्मक कार्रवाई करता है। वहीं सर्वव्यापी इस पूरे मामले की विस्तृत खबर अपने आगामी अंकों में प्रकाशित करेंगी तो पढ़िए….