गौरेला-पेंड्रा-मरवाही /सीता बनाफर/सर्वव्यापी/
जीपीएम जिले में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर सृजित कर पाने में मछली पालन विभाग विफल साबित हो रहा है l छत्तीसगढ़ नवीन मछली पालन नीति और योजनाएं केवल विभागीय फाइलों और सरकारी शिविरों तक ही सीमित होती जा रही है l जिला प्रशासन एक ओर जहां विकास एवं समृद्धि का नया आयाम लिखते हुए जीपीएम जिले के अस्तित्व का छठवां वर्ष पूर्ण होने पर अरपा महोत्सव की तैयारी में जोर-शोर से जुड़ा है, वहीं मछली पालन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण जिले के खुले बाजारों में आज भी सीमावर्ती राज्य और अन्य जिलों के मछली बेंचे जा रहे हैं l जिसके कारण जीपीएम जिले का रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए भटककता जरूरतमंद किसान केवल मूकदर्शक खरीददार बना हुआ है lयोजनाएं सरकारी शिविरों और फाइलों तक ही सीमित- मछली पालन विभाग के लापरवाही के कारण शासकीय योजनाएं का स्तर धरातल पर धड़ाम से गिरती जा रही है l जिसका दुष्प्रभाव शासन-प्रशासन की शाख पर पड़ता है, वहीं जरूरतमंद किसानों और मछुआ समितियों को शासकीय योजना से वंचित होना पड़ रहा है lविशेष पिछड़ी जनजाति बैगाओं के विकास व रोजगार के लिए विभाग के पास नहीं है कोई रोड मैप- हितग्राहियों को लाखों-करोड़ों का अनुदान मुहैया कराने वाले मछली पालन विभाग चाहे तो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा जनजातियों के लिए स्वरोजगार एवं रोजगार सृजित करा करा पाने में अपनी अहम् भूमिका निभा सकती है, लेकिन वातानुकूलित कमरों में बैठे विभागीय अधिकारी इसके लिए कोई सकारात्मक पहल नहीं कर रहे हैं lमरवाही के अनेक तालाब और जलाशय योजनाओं से वंचित- मछली पालन विभाग का जिला कार्यालय अधिक दूरी होने एवं जानकारी के अभाव में मरवाही विकासखंड के कृषकों और समितियों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है, जिसके कारण हितग्राही जोखिम नहीं उठाते और तालाबों और जलाशयों को पट्टे पर नहीं ले पाते हैं l जिससे योजनाओं के लाभ से उन्हें वंचित होना पड़ता है l मरवाही के जल संसाधन विभाग के नरौर, धरहर और बदरौड़ी के जलाशयों सहित अन्य बारहमासी जल उपलब्धता वाले ग्राम पंचायतों के कई तालाब खाली पड़े हैं l जलाशयों और तालाबों से नागरिक सूचना बोर्ड गायब – जिले के ग्राम पंचायत के बारहमासी जल उपलब्धता वाले तालाबों और जलाशयों पर लगाए जाने वाले मछली पालन विभाग का नागरिक सूचना बोर्ड विभाग की लापरवाही के कारण हमेशा गायब रहता है l जिससे अन्य इच्छुक किसानों को विभाग की शासकीय योजनाओं और समितियों की जानकारी नहीं मिल पाती है l विभागीय दौरे और कृषक प्रशिक्षण की जरूरत – जीपीएम जिले के सहायक संचालक, मछली पालन देवेंद्र कुमार वर्मा एवं अन्य मत्स्य निरीक्षक कभी भी मरवाही एवं अन्य दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा नहीं करते हैं l जिसके कारण ग्रामीण स्तर पर मछली पालन के इच्छुक कृषकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है और उन्हें योजनाओं से वंचित होना पड़ रहा है l जिले के कृषकों को समुचित प्रशिक्षण की भी आवश्यकता है जिसे दिलाने में विभाग विफल साबित हो रहा है lबहरहाल देखना यह होगा की सर्वव्यापी में खबर प्रकाशित होने के बाद योजनाओं के समुचित क्रियान्वयन को लेकर मछली पालन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा आगे क्या सकारात्मक कदम उठाई जाती है ?…