विकास नंद/ सर्वव्यापी/
जिले को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ फरवरी 2026 से 100 दिवसीय विशेष टीबी उन्मूलन अभियान की शुरुआत की जा रही है। यह अभियान राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित होगा और संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी–2030) के अनुरूप जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान का संचालन कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में किया जाएगा।अभियान के तहत पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से ग्राम स्तर पर टीबी मुक्त पंचायत अभियान को सशक्त किया जाएगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिर, उप-स्वास्थ्य केंद्र, मितानिन एवं स्वास्थ्य कर्मियों की इसमें सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव, जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ. विकास चन्द्राकर तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू धृतलहरे के मार्गदर्शन में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।वर्ष 2024 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयासों से जिले की 278 ग्राम पंचायतों को भारत सरकार द्वारा टीबी मुक्त पंचायत का दर्जा प्रदान किया गया था। इसी सफलता को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2025 में भी अभियान को जारी रखा गया और अब फरवरी 2026 से 100 दिवसीय विशेष अभियान प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें जिले के सभी विभागों को जोड़ते हुए उनकी स्पष्ट भूमिका तय की जाएगी।अभियान के दौरान सांसद महासमुंद द्वारा जिला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भ्रमण कर समीक्षा की जाएगी। साथ ही सांसद निधि से उपचाररत टीबी मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिले की कमजोर एवं उच्च जोखिम वाली आबादी—जैसे बाहरी बस्तियां, झुग्गी क्षेत्र, आदिवासी क्षेत्र और जोखिमपूर्ण कार्यस्थलों—की पहचान कर लाइन लिस्ट तैयार की जाएगी। निक्षय शिविरों के माध्यम से मोबाइल डायग्नोस्टिक जांच एवं उपचार की सुविधा दी जाएगी।आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर संभावित टीबी मरीजों की निःशुल्क डिजिटल एक्स-रे जांच तथा संदिग्ध मामलों की नॉट जांच की जाएगी। निजी चिकित्सालयों को सभी टीबी मरीजों की अनिवार्य अधिसूचना के निर्देश दिए गए हैं। जन जागरूकता अभियान के माध्यम से नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों-कर्मचारियों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने, फूड बास्केट उपलब्ध कराने एवं उनके परिवारों की सहायता करने की अपील की जाएगी।सभी मितानिनों एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रत्येक सप्ताह उपचाररत टीबी मरीजों के घर जाकर नियमित निगरानी करें। उच्च जोखिम वाले चिन्हांकित ग्रामों में संपूर्ण आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। टीबी से होने वाली मृत्यु के मामलों में डेथ ऑडिट कर मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।टीबी मुक्त पंचायत वर्ष 2025 के अंतर्गत जिले की सभी ग्राम पंचायतों द्वारा दावे प्रस्तुत किए गए हैं, जिनका मान्य संकेतकों के आधार पर जिला स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। सत्यापन के पश्चात चयनित टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों को 24 मार्च 2026, विश्व क्षय दिवस के अवसर पर प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किए जाएंगे।