मरवाही वनमण्डल में हरा हंडा शर्मसार, रात्रि दो बजे लकड़ी तस्करी का खुलासा, फोन-पे स्क्रीनशॉट बने पुख्ता सबूत।

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गौरेला ,पेंड्रा ,मरवाही/नूर मोहम्मद, श्रीनिवास सुमेर ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

जीपीएम जिले के मरवाही वनमण्डल अंतर्गत मरवाही परिक्षेत्र से वन विभाग को कटघरे में खड़ा करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ वनों की रक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारी-कर्मी ही कथित तौर पर लकड़ी तस्करी में संलिप्त पाए गए हैं। मामला 23 जनवरी की रात्रि का बताया जा रहा है, जब उसाड़ बिट के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र से लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की इमारती लकड़ी काटकर मध्यप्रदेश के तस्करों को बेचने का सौदा किया गया।सूत्रों एवं ग्रामीणों के अनुसार, लकड़ी कटाई के बाद उसे रात्रि करीब 2 बजे वाहन में लोड कर मध्यप्रदेश ले जाने की तैयारी थी। इसी दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कुछ जागरूक ग्रामीणों को संदेह हुआ कि इतनी रात में वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इमारती लकड़ी का परिवहन क्यों कराया जा रहा है। जब ग्रामीण मौके पर पहुँचे तो वन अधिकारी इधर-उधर की बातें करने लगे, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी बीच ग्रामीणों ने चुपचाप पूरे घटनाक्रम के वीडियो और फोटो भी रिकॉर्ड कर लिए।ग्रामीणों की सक्रियता बढ़ते देख मौके से अधिकांश वनकर्मी फरार हो गए, जबकि लकड़ी लेने आया व्यक्ति भाग नहीं सका। पकड़े गए व्यक्ति ने ग्रामीणों को बताया कि इस सौदे में मरवाही परिक्षेत्र अधिकारी मुकेश साहू, डिप्टी रेंजर शिवशंकर तिवारी, उसाड़ परिसर रक्षक राकेश पंकज तथा परिक्षेत्र अधिकारी मरवाही के शासकीय वाहन चालक तेज सिंह रजक उर्फ मेला की संलिप्तता है। उसने यह भी बताया कि तस्करी के एवज में 1 लाख 70 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से वाहन चालक तेज सिंह रजक के खाते में डलवाए गए, जबकि शेष 30 हजार रुपये नगद दिए गए।इस लेनदेन के फोन-पे स्क्रीनशॉट ग्रामीणों द्वारा सुरक्षित रखे गए हैं, जिन्हें पुख्ता प्रमाण माना जा रहा है। वहीं मौके पर खड़ी एक ब्रेजा कार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जो वनरक्षक राकेश पंकज की बताई जा रही है। पूरे घटनाक्रम की शिकायत मीडिया एवं उच्च वन अधिकारियों से की जा चुकी है।आश्चर्यजनक बात यह है कि इतने गंभीर आरोप और प्रत्यक्ष सबूत सामने आने के बावजूद अब तक डीएफओ मरवाही द्वारा मामले में कोई ठोस कार्रवाई या संज्ञान नहीं लिया गया है। इससे वनमण्डल अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है और यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूरे मामले को संरक्षण दिया जा रहा है।मरवाही वनमण्डल को ग्रीन लैंड के रूप में जाना जाता है और यह भालू रहवासी क्षेत्र के लिए भी प्रसिद्ध है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में यदि जंगल के रक्षक ही भक्षक बन जाएँ, तो वनों की सुरक्षा कैसे होगी, यह बड़ा प्रश्न खड़ा करता है। मामले से आक्रोशित ग्रामीणों एवं वन प्रेमियों ने संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल बर्खास्त कर कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही वनमंत्री एवं वन विभाग के मुख्य सचिव से डीएफओ मरवाही पर भी कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।वहीं इस पूरे मामले पर वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने सर्वव्यापी संपादक तरुण कौशिक से चर्चा कर कहा है कि यह कहना गलत है कि मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रकरण में तत्काल संज्ञान लिया गया है। संबंधित आर.ओ. द्वारा जांच कर प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया जा चुका है।यह मामला ₹1,69,000 (एक लाख उनहत्तर हजार रुपये) की राशि को लेकर आपसी लेन-देन से संबंधित है।इसके अतिरिक्त, जो साल की लकड़ी दिखाई जा रही है, वह पिछले वर्ष का मामला है। उक्त लकड़ी को नियमानुसार डिपो में ढुलाई कराई जा चुकी है।


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