तरुण कौशिक/ संपादक, सर्वव्यापी
केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा मार्च तक नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की नीतियों और ज़मीनी हालात के बीच विरोधाभास को उजागर किया है।भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का दावा किया था। बघेल ने कहा कि यदि नक्सलवाद वास्तव में समाप्ति की ओर है, तो फिर बस्तर संभाग के विधायक विक्रम उसेंडी को कुछ ग्रामीण इलाकों के दौरे से पुलिस अधीक्षक द्वारा रोका जाना किस बात का संकेत है?पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवालिया लहजे में कहा—“एक तरफ सरकार कहती है कि नक्सलवाद खत्म हो रहा है, दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों को यह कहकर रोका जा रहा है कि वे इलाकों में नहीं जा सकते। अगर आज भी नक्सली गतिविधियां जारी हैं, तो फिर आखिर खत्म क्या हो रहा है? बताते चलें कि जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बीजापुर द्वारा विधायक बीजापुर माननीय विक्रम मंडावी के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा संबंधी पत्र जारी किया गया है। पुलिस अधीक्षक ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित ग्रामीण भ्रमण को सुरक्षा कारणों से स्थगित करने का अनुरोध किया है।जारी पत्र के अनुसार विधायक मंडावी का 12 फरवरी को प्रातः 8 बजे भैरमगढ़ से रवाना होकर थाना भोपालपटनम, फरसेगढ़ क्षेत्रांतर्गत के अंदरूनी ग्रामों में ग्रामीणों से भेंट-मुलाकात कार्यक्रम प्रस्तावित था, जिसकी सूचना पुलिस प्रोटोकॉल के माध्यम से प्राप्त हुई थी।पुलिस अधीक्षक ने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान में प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम में शामिल ग्राम पिल्लूर, एरापल्ली, संड्रा, छोटे कांकेर एवं गुडुम जैसे क्षेत्र कच्चे सड़क मार्ग एवं अंदरूनी इलाके हैं, जहां नक्सल गतिविधियों की आशंका बनी हुई है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से उक्त भ्रमण कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित करना उचित बताया गया है।पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विधायक की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए दिनांक 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित उक्त ग्राम भ्रमण को सुरक्षा कारणों से स्थगित किए जाने हेतु अनुरोध किया गया है।इस संबंध में संबंधित राजपत्रित पुलिस अधिकारियों एवं कंट्रोल रूम बीजापुर सहित थाना प्रभारियों को आवश्यक कार्रवाई एवं सतर्कता सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।वहीं भूपेश बघेल ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में विधायक और जनप्रतिनिधि बेरोकटोक अपने क्षेत्रों में दौरा कर पाते थे, जिससे जनता से सीधा संवाद संभव था। उन्होंने इसे लोकतंत्र और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जोड़ते हुए मौजूदा हालात को चिंताजनक बताया।राजनीतिक हलकों में इस बयान को सरकार की नक्सल नीति पर सीधा हमला माना जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकार ज़मीनी हकीकत को स्वीकार करने के बजाय केवल आंकड़ों और दावों के सहारे नक्सलवाद समाप्ति का नैरेटिव गढ़ रही है?अब देखना यह होगा कि भाजपा सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या सफाई देते हैं कि क्या नक्सलवाद वाकई अंतिम सांसें गिन रहा है, या फिर खतरे अब भी उतने ही गहरे हैं?