चर्चित वन मंडल में बेलगाम अफसरशाही—अवैध लकड़ी तस्करी, दलाल–ठेकेदार गठजोड़ और शिकायतों पर भी कार्रवाई शून्य।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

प्रदेश के एक चर्चित वन मंडल में पदस्थ महिला वन अधिकारी को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री के सचिव के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद न तो फाइलें आगे बढ़ रहीं हैं और न ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े व्यक्ति का वैध कार्य हो पा रहा है। पीड़ित पक्ष को लंबे समय से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
इसी वन मंडल में सर्वण समुदाय से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल चलने के आरोप भी सामने आए हैं। कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की चर्चाएं आम हैं। बताया जा रहा है कि एक रेंजर अपने मूल राज्य से ठेकेदारों को बुलाकर पूरे वन मंडल में ठेकों और कटाई के माध्यम से लूट मचाए हुए है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इन अनियमितताओं की शिकायत स्वयं वन मंडलाधिकारी द्वारा उच्च अधिकारियों तक की जा चुकी है, इसके बावजूद न तो संबंधित रेंजर हटाया गया और न ही किसी प्रभावी जांच की पहल हुई। विभागीय सूत्रों का दावा है कि सीसीएफ और पीसीसीएफ स्तर पर शिकायतें लंबित पड़ी हैं, जिससे यह संदेश जा रहा है कि विभागीय संरक्षण में पूरा खेल संचालित हो रहा है।
विभागीय दलालों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिनके जरिए महिला अधिकारी पर दबाव और ब्लैकमेलिंग की चर्चाएं हैं। नतीजतन, शासन के निर्देश कागजों तक सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर अवैध गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस चर्चित वन मंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी।प्रदेश के एक चर्चित वन मंडल में पदस्थ महिला वन अधिकारी को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। आरोप है कि मुख्यमंत्री के सचिव के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद न तो फाइलें आगे बढ़ रहीं हैं और न ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े व्यक्ति का वैध कार्य हो पा रहा है। पीड़ित पक्ष को लंबे समय से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।इसी वन मंडल में सर्वण समुदाय से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल चलने के आरोप भी सामने आए हैं। कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर करोड़ों रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित किए जाने की चर्चाएं आम हैं। बताया जा रहा है कि एक रेंजर अपने मूल राज्य से ठेकेदारों को बुलाकर पूरे वन मंडल में ठेकों और कटाई के माध्यम से लूट मचाए हुए है।सबसे गंभीर पहलू यह है कि इन अनियमितताओं की शिकायत स्वयं वन मंडलाधिकारी द्वारा उच्च अधिकारियों तक की जा चुकी है, इसके बावजूद न तो संबंधित रेंजर हटाया गया और न ही किसी प्रभावी जांच की पहल हुई। विभागीय सूत्रों का दावा है कि सीसीएफ और पीसीसीएफ स्तर पर शिकायतें लंबित पड़ी हैं, जिससे यह संदेश जा रहा है कि विभागीय संरक्षण में पूरा खेल संचालित हो रहा है।विभागीय दलालों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जिनके जरिए महिला अधिकारी पर दबाव और ब्लैकमेलिंग की चर्चाएं हैं। नतीजतन, शासन के निर्देश कागजों तक सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर अवैध गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं। अब सवाल यह है कि क्या सरकार इस चर्चित वन मंडल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई करेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


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