सरायपाली–सारंगढ़ नेशनल हाइवे निर्माण के गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

महासमुंद जिले के सरायपाली विकासखंड से सारंगढ़ के मध्य निर्माणाधीन सड़क एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस बहुप्रतीक्षित सड़क एवं इससे जुड़े पुल–पुलियों की गुणवत्ता, निर्माण की धीमी गति और सुरक्षा इंतजामों की कमी को लेकर स्थानीय नागरिकों व ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि सरायपाली–सारंगढ़–रायगढ़ मार्ग से होकर प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी मालवाहक और बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क व पुल–पुलियों का निर्माण अत्यंत मजबूत और टिकाऊ होना चाहिए। लेकिन मौके पर देखा जा रहा है कि पुल–पुलिया निर्माण में 10 एमएम और 12 एमएम के सरियों का उपयोग किया जा रहा है, जो लंबे समय तक भारी वाहनों का भार सहन करने में सक्षम नहीं माने जा रहे। जबकि नेशनल हाईवे स्तर के निर्माण कार्यों में अपेक्षाकृत 16-20-25 मि. मीटर के मोटे और उच्च गुणवत्ता वाले सरियों के इस्तेमाल का प्रावधान होता है।

इस पूरे मामले में जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एसडीओ से सड़क निर्माण से संबंधित सूचना फलक बोर्ड, तकनीकी विवरण और स्वीकृत स्टीमेट को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने यह कहकर जवाब टाल दिया कि “स्टीमेट में जो सामग्री स्वीकृत है, उसी का उपयोग किया जा रहा है।”सूचना फलक गायब, चिंताजनक पहलू यह भी है कि इतने बड़े निर्माण कार्य के बावजूद मौके पर अब तक सूचना फलक बोर्ड नहीं लगाया गया है। इससे न तो आम जनता को निर्माण की लागत राशि की जानकारी है और न ही सड़क की गुणवत्ता व मानकों का कोई स्पष्ट विवरण सामने आ रहा है।

निर्माण के दौरान सड़क के बीच पुल–पुलिया बनाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे खोदे गए हैं, लेकिन वहां राहगीरों की सुरक्षा के लिए न तो बेरिकेडिंग की गई है और न ही चेतावनी के समुचित संकेत लगाए गए हैं। खासकर रात्रि के समय इन स्थानों पर दुर्घटना का गंभीर खतरा बना हुआ है।

धूल से बेहाल ग्रामीण, पानी का छिड़काव नाकाफीसड़क निर्माण की धीमी गति ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। सड़क किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों को उड़ती धूल से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार निर्माण स्थल पर दिन में कम से कम चार–पांच बार पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि एक दिन में केवल एक-दो बार ही पानी डाला जा रहा है, वह भी औपचारिकता निभाने के लिए।मिलीभगत का आरोप, गुणवत्ता से समझौते की आशंकाग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि एनएचएआई के अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत के चलते निर्माण कार्य में गुणवत्ता को नजरअंदाज किया जा रहा है। न तो समय-सीमा का पालन हो रहा है और न ही मानकों के अनुरूप कार्य किया जा रहा है।

गौरतलब है कि सरायपाली और सारंगढ़ के मध्य सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से जनहित में लंबित थी। लोगों को इस सड़क से बेहतर आवागमन और विकास की उम्मीदें थीं। लेकिन यदि समय रहते गुणवत्ता, पारदर्शिता और सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह बहुप्रतीक्षित परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती है।

अब जरूरत है कि जनप्रतिनिधि, प्रशासन और संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य पर गंभीरता से निगरानी रखें, ताकि जनता की उम्मीदों पर पानी न फिरे और यह सड़क भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण न बने।


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