शताब्दी पुरानी आस्था का जीवंत प्रतीक…101वर्षीय प्राचीन स्वयंभू लोकेश्वर महादेव मंदिर।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सरायपाली विकास खंड के ग्राम दर्राभांठा स्थित 101 वर्ष प्राचीन स्वयंभू लोकेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। अल सुबह से ही शिव भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर में उमड़ पड़ीं, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और परिवार व गांव की सुख-समृद्धि की कामना की।

ग्राम दर्राभांठा के अंतिम छोर पर स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण सन् 1925 में गांव के गौंटिया स्वर्गीय गाणाराय पटेल के सुपुत्र लोकनाथ पटेल एवं श्रीराम पटेल द्वारा कराया गया था। श्रद्धालुओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, यह मंदिर अपनी विशिष्ट निर्माण शैली के लिए भी जाना जाता है।

मंदिर के निर्माण में किसी भी प्रकार के छड़ या सरिया का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि इसे पूरी तरह चुना और मिट्टी से निर्मित किया गया है, जो आज भी अपनी भव्यता और मजबूती के साथ श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मान्यता है कि यहां विराजमान लोकेश्वर महादेव स्वयंभू हैं और सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि महाशिवरात्रि जैसे पर्व पर आसपास ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर को विशेष रूप से रुद्राभिषेक और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारों से गांव गुंजायमान रहा।श्रद्धालुओं का कहना है कि यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि गांव की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान भी है। 101 वर्षों से यह मंदिर शिव भक्तों की आस्था का प्रतीक बना हुआ है और आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी आध्यात्मिक विरासत से जोड़ रहा है।


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