मरवाही वन परिक्षेत्र में अवैध कटाई, अंतरराज्यीय तस्करी और वसूली का आरोप, उच्चस्तरीय शिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य।

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तरुण कौशिक/संपादक ,सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वन परिक्षेत्र में अवैध वृक्ष कटाई, अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी और शासकीय संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले को लेकर संबंधित उच्चाधिकारियों को भेजे गए विस्तृत शिकायती पत्र में क्षेत्र की वन संपदा की सुरक्षा व्यवस्था को अत्यंत चिंताजनक बताया गया है।पत्र में कहा गया है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर जंगलों की रक्षा का संवैधानिक एवं वैधानिक दायित्व है, उन्हीं पर अवैध कटाई, अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी और अवैध वसूली के संगठित तंत्र में संलिप्त होने के गंभीर, तथ्यात्मक और प्रमाणित आरोप सामने आए हैं। यह स्थिति न केवल वन संरक्षण कानूनों की खुलेआम अनदेखी को दर्शाती है, बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।शिकायत के अनुसार मरवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत कटरा, उपाड़ एवं बेलझिरिया ग्रामों की वन भूमि में साल एवं सागौन जैसे राष्ट्रीयकृत और बहुमूल्य वृक्षों की रात्रिकालीन अवैध कटाई कराई गई। आरोप है कि कटे हुए वृक्षों को छत्तीसगढ़ से बाहर मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश भेजकर बड़े पैमाने पर तस्करी की गई, जो भारतीय वन अधिनियम एवं वन संरक्षण अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।मामले में यह भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि मरवाही वन परिक्षेत्र के शासकीय वाहन का उपयोग रात्रि समय बरौर–मरवाही मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों से अवैध वसूली के लिए किया गया। इसे एक संगठित आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा गया है कि शासकीय वाहन का इस प्रकार दुरुपयोग भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोप है कि 1 लाख 44 हजार रुपये की ऑनलाइन राशि परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) के शासकीय वाहन चालक के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि कोई भी चालक इस तरह का आर्थिक लेन-देन स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकता, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरा लेन-देन उच्च अधिकारियों की जानकारी, सहमति और संरक्षण में किया गया। इसके अतिरिक्त लगभग 30 हजार रुपये की नकद अवैध वसूली की भी बात सामने आई है, जिसमें परिक्षेत्र अधिकारी की उपस्थिति की जानकारी होने का दावा किया गया है।पत्र में यह भी कहा गया है कि 23 जनवरी 2026 की रात लगभग 2 बजे परिक्षेत्र अधिकारी, वन रक्षक और वाहन चालक की संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गईं। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए मोबाइल फोन लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और शासकीय वाहन की GPS लोकेशन की तकनीकी जांच तत्काल कराए जाने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।हैरानी की बात यह है कि प्रकरण उजागर होने के कई दिनों बाद भी आज दिनांक तक न तो किसी अधिकारी या कर्मचारी को निलंबित किया गया है और न ही कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इससे साक्ष्यों के प्रभावित होने, गवाहों पर दबाव बनने और जांच को भटकाने की गंभीर आशंका जताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं और अधीनस्थ कर्मचारियों पर मानसिक दबाव और प्रताड़ना के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे निष्पक्ष जांच पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।इस पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, बिलासपुर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पाण्डेय तथा मरवाही वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद को की जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं होना इस आशंका को बल देता है कि पूरे प्रकरण में संलिप्त लोगों को उच्चस्तरीय संरक्षण प्राप्त है।शिकायतकर्ता ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि उपलब्ध प्रथम दृष्टया तथ्यों के आधार पर वन संरक्षण अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच प्रभावित होने से रोकने के लिए निलंबित किया जाए तथा दोष सिद्ध होने पर कठोरतम विभागीय और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर वन संरक्षण, कानून व्यवस्था और जनहित में निष्पक्ष एवं निर्णायक कार्रवाई करेंगे, या फिर मरवाही के जंगल इसी तरह अवैध कटाई और तस्करी की भेंट चढ़ते रहेंगे।


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