गौरेला -पेंड्रा-मरवाही/ नूर मोहम्मद, ब्यूरोचीफ, सर्वव्यापी
मरवाही वन मंडल में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के भीतर कथित भ्रष्टाचार और भारी अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। बीते विधानसभा सत्र में सत्ता पक्ष के ही विधायकों द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना, सरकार और विभागीय नेतृत्व की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।विधानसभा के भीतर जब इस क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर तीखे सवाल किए गए, तब जिम्मेदार मंत्री केदार कश्यप को घेरने का प्रयास किया गया। किंतु सत्र समाप्त होने के बाद भी न तो दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई और न ही किसी जांच के आदेश सामने आए। इससे यह संदेश गया कि या तो आरोपों में दम नहीं है, या फिर राजनीतिक संरक्षण के चलते फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं।स्थानीय स्तर पर चर्चा और आरोप और भी गंभीर हैं। मरवाही वन मंडल के कुछ कर्मचारी और अधिकारी खुलेआम यह कहने का दावा कर रहे हैं कि वे हर महीने “निर्धारित मोटी रकम” ऊपर तक पहुंचाते हैं, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई संभव नहीं हो पा रही। यह दावा कितना सच है, इसका खुलासा जांच से ही हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि जब ऐसे आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं तो अब तक विभागीय या स्वतंत्र जांच क्यों नहीं हुई?जनता और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि मंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं, तो उन्हें बिना देरी के निष्पक्ष जांच के आदेश देकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अन्यथा यह धारणा मजबूत होगी कि मरवाही वन मंडल में चल रहा कथित भ्रष्टाचार राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है।
अब निगाहें सरकार और वन मंत्री पर टिकी हैं, क्या वे इन आरोपों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेंगे, या फिर मरवाही वन मंडल में भ्रष्टाचार के ये आरोप यूं ही फाइलों में दबकर रह जाएंगे?