तरुण कौशिक, संपादक ,सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ निर्माण के वर्षों बाद भी विकास की रोशनी कई गांवों तक नहीं पहुँच सकी है। इसका जीवंत उदाहरण बिलासपुर जिला के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जनपद पंचायत तखतपुर की ग्राम पंचायत घोंघाडीह है, जो बिलासपुर–कोटा मार्ग पर गनियारी से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। गांव में न तो नालियों की व्यवस्था है और न ही पक्की सड़कों का कोई नामोनिशान, जिससे ग्रामीणों को रोज़मर्रा के जीवन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बरसात के मौसम में पूरा गांव कीचड़ और जलभराव में डूब जाता है, वहीं गर्मियों में उड़ती धूल से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत में विकास के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गई हैं। सरकारी योजनाएं स्वीकृत तो होती हैं, राशि भी जारी होती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई देती है। तस्वीरें साफ तौर पर यह दर्शाती हैं कि विकास निर्माण कार्य या तो शुरू ही नहीं हुए या फिर अधूरे छोड़ दिए गए हैं।ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पंचायत में विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं। मुख्य मार्ग के इतने नजदीक होने के बावजूद घोंघाडीह को विकास से वंचित रखा जाना कई सवाल खड़े करता है। आरोप है कि विकास की आड़ में खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है, जिसकी आज तक निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई।स्थिति यह है कि सरकार की किसी भी योजना का वास्तविक लाभ गांव तक नहीं पहुँच पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पंचायत में कराए गए सभी विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और गांव में तत्काल नाली व पक्की सड़क जैसे मूलभूत निर्माण कार्य शुरू कराए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें काग़ज़ों में नहीं, बल्कि ज़मीन पर विकास दिखाई देना चाहिए, क्योंकि घोंघाडीह की वर्तमान तस्वीरें विकास नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की सच्चाई बयान कर रही हैं।