हिंदी विश्वविद्यालय में मनाया मराठी भाषा गौरव दिवस… कुलपति ने मराठी में किया संबोधित… पारंपरिक फेटा बांधकर किया स्वागत।

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तरुण कौशिक, संपादक ,सर्वव्यापी

अभिजात मराठी भाषा का संरक्षण और संवर्धन हमारा सामूहिक कर्तव्य है। मराठी भाषा में ज्ञान से समृद्ध है जिसे मराठी भाषा के साहित्यकारों और पत्रकारों ने अपनी सृजनशीलता से विश्व भर में पहुंचाया है।‌ यह विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय में आयोजित मराठी भाषा गौरव दिवस कार्यक्रम में व्यक्त किए। विश्वविद्यालय की कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार मराठी में दिए अपने भाषण में उन्होंने सभी को मराठी में मराठी भाषा गौरव दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए अपने विचार रखें। ग़ालिब सभागार में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मराठी का भवितव्य’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें रेणुका महाविद्यालय नागपुर की मराठी विभाग प्रमुख प्रो. प्रेमा लेकुरवाळे मुख्य अतिथि एवं वक्ता थी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि भाषाएं केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। हमारा संस्कृति बोध एक ही है। सभी भारतीय भाषाएं भारत का स्वाभिमान व हमारे अस्तित्व का अंग है। हमारी भाषाएं हमारी संस्कृति का आधार भी है। मराठी को समृद्ध बनाने में संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और सुप्रसिद्ध पत्रकार बाबूराव विष्णु पराड़कर के योगदान को रेखांकित करते हुए कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि मराठी भाषा में रोज़गार के अनेक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं और मराठी भाषा का मीडिया भी आगे बढ़ रहा है।‌ उन्होंने उपस्थितों को बताया कि वर्धा आने के एक वर्ष के भीतर मराठी में बोलने का यह उनका पहला प्रयास रहा और स्वयं के लिए एक परीक्षा की घड़ी रही। इसपर तालियों की गड़गड़ाहट से उपस्थितों ने खड़े होकर उनके इस प्रेरक प्रयास का अभिनंदन किया। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने अपने वक्तव्य का समापन सुप्रसिद्ध कवि सुरेश भट के इस गीत से किया ‘लाभले आम्हास भाग्य बोलतो मराठी जाहलो खरेच धन्य ऐकतो मराठी धर्म, पंथ, जात एक जाणतो मराठीएवढ्या जगात माय मानतो मराठी’कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. प्रेमा लेकुरवाळे ने कहा कि भाषा के साथ बोली का भी संरक्षण व संवर्धन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा हमारी संस्कृति का आत्मा है। देश-विदेश में मराठी का परचम लहरा रहा है तथा डिजिटल माध्यमों में भी मराठी की उपस्थिति गर्व का विषय है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मराठी की चर्चा करते हुए कहां कि इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे विषयों की पढ़ाई के लिए पाठ्यक्रम मराठी में तैयार हो रहे हैं, इससे मराठी भाषा में रोज़गार उपलब्ध हो सकेंगे। कार्यक्रम में स्वागत भाषण साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने दिया। उन्होंने भक्ति आंदोलन में मराठी संतों के योगदान को रेखांकित करते हुए कुसुमाग्रज, शिवाजी सावंत और अन्नाभाऊ साठे से लेकर नामदेव ढसाळ तक के मराठी साहित्य में दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की प्रस्तावना संयोजक डॉ. संदीप सपकाले ने रखी। उन्होंने बताया कि सन 2014 से विश्वविद्यालय में मराठी विभाग स्थापित किया गया और तब से हर वर्ष मराठी भाषा गौरव दिवस बड़े धूमधाम से मनाया जाता रहा है। विद्यार्थी मणि दीप मिश्रा ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार ज्ञापन कार्यक्रम संयोजक डॉ. शैलेश मरजी कदम ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं विष्णु वामन शिरवाडकर के फोटो पर पुष्प अर्पित कर किया गया। विश्वविद्यालय का कुलगीत और जय जय महाराष्ट्र माझा गर्जा महाराष्ट्र माझा इस महाराष्ट्र जीत से कार्यक्रम शुरू हुआ। विशेष बात यह थी कि कार्यक्रम में उपस्थित सभी को पारंपरिक पगडी (फेटा) पहनाई गई। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।‌


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