विकास नंद/सर्वव्यापी/
देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त प्रदेश बनाने की दिशा में निर्णायक कदम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में मार्च माह के पहले ही दिन महासमुंद जिले के बलौदा थाना क्षेत्र में करीब 15 नक्सलियों द्वारा आत्मसमर्पण किया जाना नक्सलवाद के कमजोर होते अस्तित्व की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।यह आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि नक्सली संगठन अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं और शासन-प्रशासन की रणनीति जमीन पर असर दिखा रही है। महासमुंद जिला पुलिस द्वारा इस संबंध में आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों, उनकी पृष्ठभूमि और आगे की कार्यवाही को लेकर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
हालांकि, इस सकारात्मक घटनाक्रम के बीच एक अहम सवाल भी उभरकर सामने आया है—क्या सरायपाली विकासखंड के कुछ ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों में अब भी नक्सली खामोशी से सक्रिय हैं? क्या वे सामान्य नागरिकों की तरह जीवन यापन करते हुए अपनी मौजूदगी छिपाए हुए हैं?
स्थानीय स्तर पर इस विषय को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं और लोग स्थिति की वास्तविकता जानने को उत्सुक हैं।फिलहाल, बलौदा में हुए सामूहिक आत्मसमर्पण ने यह तो साफ कर दिया है कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
आने वाले दिनों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता यह तय करेगी कि छत्तीसगढ़ वास्तव में तय समयसीमा में नक्सल मुक्त बनने का लक्ष्य हासिल कर पाता है या नहीं।