महासमुंद में श्रमिक कल्याण की बड़ी पहल: 3106 श्रमिकों को मिले 1.51 करोड़ रुपये से अधिक।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी/

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप श्रम विभाग द्वारा वर्ष 2025-26 में श्रमिकों के हित में प्रभावी कदम उठाए गए हैं। सशक्त श्रमिक, समृद्ध छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करते हुए महासमुंद जिले के कुल 3106 श्रमिकों एवं उनके परिवारों को 1 करोड़ 51 लाख 57 हजार 630 रुपये की आर्थिक सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की गई।श्रम विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जरूरतमंद श्रमिकों को समय पर सहायता मिली, जिससे लाभान्वित हितग्राहियों ने राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत मिली सहायतादीदी ई-रिक्शा सहायता योजना: एक महिला हितग्राही को 1 लाख रुपये की सब्सिडी पर ई-रिक्शा, स्वरोजगार से जुड़ाव।मिनीमाता महतारी जतन योजना: 93 शिशुवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व हेतु 18.60 लाख रुपये।मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना: 2 श्रमिकों को 3 हजार रुपये के सुरक्षा उपकरण।मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना: 29 पीड़ित परिवारों को 29 लाख रुपये।मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना: 6 बालिकाओं को 1.20 लाख रुपये।मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना: 2502 विद्यार्थियों को शिक्षा हेतु 50.12 लाख रुपये।मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना: 255 श्रमिकों को 8.87 लाख रुपये के औजार।मुख्यमंत्री श्रमिक सियान सहायता योजना: 214 वृद्ध श्रमिकों को 42.60 लाख रुपये।मुख्यमंत्री सायकल सहायता योजना: 4 श्रमिकों को 14,824 रुपये।श्रम विभाग की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन जिला प्रशासन की सतत निगरानी एवं विभागीय समन्वय से किया गया। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के निर्देशन में पात्र हितग्राहियों की पहचान, दस्तावेज सत्यापन और समयबद्ध भुगतान को प्राथमिकता दी गई, जिससे कोई भी पात्र श्रमिक लाभ से वंचित न रहे।नयापारा वार्ड, महासमुंद की निवासी श्रीमती लीला महानंद ने दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत ई-रिक्शा मिलने पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री एवं राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि ई-रिक्शा अब उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत बन गया है। तीन बेटियों वाले इस परिवार की आर्थिक स्थिति पहले कमजोर थी, लेकिन अब नियमित आय से वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।यह पहल महासमुंद जिले में श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है।


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