तरुण कौशिक, संपादक ,सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में शीर्ष पद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वर्ष 1990 बैच के आईएफएस अधिकारी श्रीनिवासन राव मई 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जिसके बाद इस प्रतिष्ठित पद पर नियुक्ति को लेकर दावेदारों की लंबी सूची सामने आ रही है।विभागीय सूत्रों के अनुसार इस पद के लिए प्रमुख रूप से 1994 बैच के अरुण कुमार पाण्डेय, 1997 बैच के ओमप्रकाश यादव, 1988 बैच के सुधीर कुमार अग्रवाल, 1993 बैच के आलोक कटियार सहित राजेश चंदेले और संजीता गुप्ता जैसे वरिष्ठ अधिकारी दावेदारी में बताए जा रहे हैं। सभी अधिकारी अपने-अपने अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।विभागीय सूत्रों की मानें तो इन दावेदारों में से एक अधिकारी के खिलाफ एसीबी और अन्य जांच एजेंसियों में भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की जांच लंबित है। हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से अभियोजन स्वीकृति या किसी ठोस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।विभागीय सूत्रों के हवाले से यह चर्चा तेज है कि इस पद पर नियुक्ति के लिए कुछ राजनैतिक से जुड़े प्रभावशाली लोगों द्वारा भारी भरकम 20 करोड़ रुपए राशि की कथित मांग या वसूली की बातें सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही सरकार की ओर से इस संबंध में कोई बयान जारी किया गया है।दावेदारों की सूची लंबी बताई जा रही है, जिनमें विभिन्न बैचों के वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी शामिल हैं। विभागीय सूत्र यह भी बताते हैं कि एक दावेदार अधिकारी के विरुद्ध एसीबी और अन्य एजेंसियों में शिकायतें लंबित हैं, लेकिन इस पर भी अब तक कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं हुआ है।राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस नियुक्ति को लेकर सत्ता के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार पर विभिन्न स्तरों से सिफारिशों और दबाव की चर्चाएं भी सुनाई दे रही हैं। हालांकि सरकार की ओर से इन सभी आरोपों या चर्चाओं पर कोई अधिकृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अंतिम निर्णय शीघ्र ही लिया जा सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड को प्राथमिकता या फिर घोटालेबाजों , भ्रष्टाचारियों मिलेगी या फिर चर्चाओं में चल रहे कथित लेन-देन के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?वन विभाग की इस अहम नियुक्ति पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं। यदि “20 करोड़ की बोली” की चर्चा में जरा भी सच्चाई है, तो यह न केवल प्रशासनिक तंत्र बल्कि सुशासन की छवि पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। फिलहाल, आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।इधर प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगले पीसीसीएफ की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हैं। राज्य की विष्णु देव साय सरकार पर विभिन्न स्तरों से दबाव और सिफारिशों की चर्चा है। अनौपचारिक चर्चाओं में यह तक कहा जा रहा है कि कुछ प्रभावशाली संगठनों से जुड़े लोगों द्वारा इस पद के नाम पर भारी राशि की वसूली की बातें भी सामने आ रही हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।विभागीय सूत्रों के अनुसार एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिल्ली स्तर पर भी संपर्क साधने की कोशिश की है और शीघ्र ही इस मामले में अंतिम निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।अब सवाल यही है कि क्या वरिष्ठता को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरण तय करेंगे कि छत्तीसगढ़ का अगला पीसीसीएफ कौन होगा?वन विभाग की इस अहम कुर्सी पर किसकी ताजपोशी होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल सत्ता और सिस्टम के बीच चल रही इस खींचतान ने पूरे प्रशासनिक महकमे में उत्सुकता और चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। वहीं बताते चलें कि पूर्व में भी भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने निगम मंडल आयोग बोर्ड में खुद की नियुक्ति को लेकर करोड़ों रुपए की मांग करने का आरोप लगा चुके हैं। ऐसे में यह कहना ग़लत नहीं होगा कि इस पद के लिए जो बोली 20 करोड़ की बताई जा रही है, वह ऐसे ही चर्चा में नहीं आई है। बहरहाल देखना है कि अगला पीसीसीएफ ईमानदार बनते हैं या घोटालेबाज को जिम्मेदारी सौंपी जाती है।